दक्षिणपंथी संगठनों और नेताओं में गांधीजी को लेकर अचानक चिंता क्यों बढ़ गई है? क्या यह विचारधारा की नई लड़ाई है या फिर गांधीजी की विरासत को कमजोर करने की साजिश? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
क्या कर्नाटक में मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण मिला है? बीजेपी इसे तुष्टिकरण बता रही है, जबकि सिद्धारमैया सरकार ने इसका बचाव किया है। जानें इस विवाद का पूरा सच।
वी-डेम इंस्टिट्यूट की ताज़ा रिपोर्ट में भारत में लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष चुनावों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। क्या देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
भारत में तीन भाषा नीति को लेकर फिर विवाद तेज़। क्या ‘एक देश, एक भाषा’ के सिद्धांत से क्षेत्रीय भाषाओं की उपेक्षा हो रही है? जानिए इस बहस के पीछे की सच्चाई और राजनीतिक नज़रिया।
जब चीन AI जैसे क्षेत्र में दुनिया को चौंका रहा है तो भारत मंदिर-मस्जिद पर बहस में उलझा है। क्या यह प्रतिक्रांति भारत को फिर पीछे ले जाएगी? पढ़ें यह गहन विश्लेषण।
होली के बीच रमज़ान के दौरान मस्जिदों को तिरपालों से ढँकने और जुमे की नमाज़ का समय बदलने का मामला सुर्खियों में है। आख़िर इसको लेकर पीएम मोदी चुप क्यों हैं? जानिए पूरी रिपोर्ट।
भारत में स्टारलिंक को मिली मंजूरी से सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह कैसे दूरसंचार उद्योग को प्रभावित करेगा, डेटा कनेक्टिविटी में क्या सुधार होंगे, और Jio-Airtel जैसी कंपनियों पर इसका क्या असर पड़ेगा? जानिए पूरी जानकारी।
भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब में होली का विशेष स्थान था, जहाँ मुग़ल बादशाह भी रंगों में सराबोर होते थे। लेकिन आज माहौल बदल रहा है—मस्जिदों को ढंका जा रहा है। ऐसा क्यों? पढ़ें इतिहास और वर्तमान के बदलते रंग।
क्या हिंदू त्योहारों को किसी खास एजेंडे के तहत प्रोपगेंडा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है? जानिए इसके पीछे की सच्चाई और इससे जुड़े विवादों पर विश्लेषण।
औरंगज़ेब की छवि को लेकर घमासान मचा है। लेकिन क्या आपको पता है कि बीजेपी नेता रीता बहुगुणा जोशी भी कह चुकी हैं कि औरंगज़ेब की छवि इतिहास में 'ग़लतफ़हमियों का शिकार' रही है? जानें पूरा विवाद क्या है।
दिल्ली में बीजेपी सरकार महिलाओं को मासिक 2500 रुपये देने सहित अन्य गारंटियों के अपने वादे को क्यों पूरा नहीं कर पा रही है? क्या इन गारंटियों को पूरा करने के लिए टैक्स बढ़ाना होगा?
बिहार की राजनीति में दशकों से वही पुराने चेहरे हावी हैं, लेकिन क्या वे नई चुनौतियों का सामना कर पाएंगे? क्या राज्य को नए नेतृत्व की जरूरत है? जानिए इस विश्लेषण में।
पूर्व मंत्री अरुण शौरी ने अपनी किताब में सावरकर के 'देशप्रेम और साहस' की पड़ताल करते हुए उन्हें 'झूठा और मनगढंत' करार दिया। जानिए, उनके बयान के पीछे की पूरी कहानी।