समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के आगरा स्थित उनके आवास पर करणी सेना ने बुधवार को हमला कर दिया। उन लोगों ने सांसद के घर के गेट को तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की। वहां खड़ी गाड़ियों तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इतना ही नहीं, उन्होंने खिड़कियों और दरवाजों पर पथराव भी किया, जिससे घर को काफी नुकसान हुआ।
वजह? यही कि समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा पर वह टिप्पणी की थी जिससे कुछ इतिहासकार भी सहमति रखते हैं। रामजी लाल सुमन ने आरोप लगाया था कि राणा सांगा ने लोधी राजाओं को हराने के लिए बाबर को भारत बुलाया था। इस टिप्पणी के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रामजी लाल सुमन के बयान देते ही राजस्थान के कई नेता नाराज़ हो गये। सियासी चालें तेज़ हो गईं। गौरतलब है राजपूत समुदाय राणा सांगा और उनके पोते महाराणा प्रताप को अपना आदर्श मानता रहा है।
भाजपा नेताओं के बयान के बाद भड़की सियासत!
रामजी सुमन के बयान के आने के बाद भाजपा नेताओं ने भी तरह-तरह की टिप्पणियाँ कीं जिससे रामजी सुमन के खिलाफ़ माहौल तैयार हुआ। भाजपा के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा, "राणा सांगा भारत की पहचान रहे हैं। उन्होंने अपने पूरे जीवन में बाबर और अन्य आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। देश की रक्षा करने वाले के बजाय एक आक्रमणकारी को महिमामंडित करना बेहद अशोभनीय और अनुचित है।"
भाजपा सांसद शशांक मणि ने समाजवादी पार्टी के सांसद के बयान को "निंदनीय" बताया और कहा कि लोगों को राणा सांगा जैसे महापुरुषों को नमन करना चाहिए, न कि ऐसे "अनुचित" बयान देने चाहिए।
रामजी लाल सुमन का बयान!
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार राम जी लाल सुमन बाबर पर हुए हंगामे के विषय में अपनी बातें रख रहे थे। उन्होंने कहा कि "भाजपा नेता अक्सर दावा करते हैं कि मुसलमानों में बाबर का डीएनए है। लेकिन बाबर को भारत किसने बुलाया था? यह राणा सांगा थे जिन्होंने इब्राहिम लोधी को हराने के लिए उन्हें बुलाया था। उस तर्क से, अगर मुसलमान बाबर के वंशज हैं, तो आप भी राणा सांगा—एक गद्दार—के वंशज हैं।"
क्यों लगाया रामजी सुमन राणा सांगा पर आरोप?
इसे जानने के लिए इतिहास के पन्नों को पलटना पड़ेगा। राणा सांगा या संग्राम सिंह प्रथम राजस्थान के सबसे प्रिय राजाओं में से एक माने जाते रहे हैं। कहा जाता है कि उन्होंने 1508 से 1528 तक मेवाड़ पर शासन किया। इतिहास के अनुसार उन्होंने दिल्ली, मालवा और गुजरात के सुल्तानों को 18 निर्णायक युद्धों में हराया। इतना ही नहीं, उन्होंने मुगल वंश के संस्थापक बाबर के खिलाफ दो निर्णायक लड़ाइयाँ लड़ीं।
कहा जाता है कि 1527 में बयाना की लड़ाई में राणा सांगा ने मुगल सेना को ध्वस्त कर दिया था, बाबर के शिविर पर कब्जा कर लिया और युद्ध का सामान—हथियार, गोला-बारूद, संगीत वाद्ययंत्र और यहाँ तक कि तंबू—लूट लिए। इनमें से कुछ वस्तुएँ उदयपुर के संग्रहालयों में प्रदर्शित हैं।
हालाँकि, राणा दो महीने बाद खानवा की लड़ाई हार गए जब बाबर पहली बाटर तोप लेकर आया। राणा के पास तोप से लड़ने का कोई उपाय नहीं था। कहा जाता है कि युद्ध के बाद राणा अपने घावों की वजह से चल बसे।
इन्हीं राणा सांगा के बारे में इतिहास में कई मत हैं। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि राणा ने बाबर को चिट्ठी लिखकर इब्राहिम लोदी से लड़ने के लिए बुलाया था, वहीं कुछ इतिहासकार इस मान्यता को प्रपंच करार देते हैं। मसलन रवि भट्ट जैसे इतिहासकार बाबरनामा के हवाले से साफ़-साफ़ कह रहे हैं कि राणा सांगा ने ही बाबर को बुलाया था। दूसरी तरफ़ इतिहासकार चंद्रप्रकाश शर्मा का कहना है कि "राणा सांगा ने पहले ही इब्राहिम लोधी को एक बार हरा दिया था, तो उन्हें बाबर की मदद की क्या ज़रूरत थी?"
हमले के बाद रामजी सुमन का बयान!
आगरा के घर पर हुए हमले के बाद सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने अपने बयान को लेकर बात साफ़ करने की कोशिश की है। उन्होंने पत्र लिखकर यह स्पष्ट किया है कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था और यदि ऐसा हुआ है तो उन्हें इसका खेद है। अपने पत्र में उन्होंने यह भी कहा है कि वे सभी जातियों, वर्गों और संप्रदायों का सम्मान करते हैं, और राजपूत समाज के गौरवशाली इतिहास को भी स्वीकार करते हैं।
सुमन ने यह भी कहा कि उनके राज्यसभा में दिए गए बयान का आशय यह था कि हमें इतिहास के पुराने विवादों को फिर से नहीं उभारना चाहिए। लेकिन उनके बयान की मूल भावना को छोड़कर उसे ग़लत तरीक़े से पेश किया गया और इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर दिया गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन समाजवादी मूल्यों के प्रति समर्पित रहा है।
रामजी लाल सुमन के बयान के बाद ऐसा महसूस हो रहा है कि यह मामला अब शांत हो जाएगा। एक सवाल यहाँ यह उठता है कि क्या नेताओं को भी अपनी बात रखने की आज़ादी नहीं है? वे बोलेंगे तो उन पर यूं हमले होंगे?
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