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मेरठ की प्रोफेसर ने आरएसएस पर सवाल पूछा तो परीक्षा ड्यूटी से रोका गया

मेरठ के एक कॉलेज की प्रोफेसर को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से आयोजित परीक्षा में ड्यूटी से पूरी जिन्दगी के लिए रोक दिया गया है। यह कार्रवाई उनके द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में आपत्तिजनक सवाल शामिल करने के आरोप में की गई है। यह घटना उस समय सामने आई जब सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र की तस्वीरें वायरल हो गईं, जिसके बाद व्यापक विवाद शुरू हो गया।

यूपीपीएससी ने 30 मार्च को सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) की एक प्रोफेसर, जो प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति का हिस्सा थी, ने कथित तौर पर सामान्य ज्ञान खंड में एक सवाल शामिल किया था। जिसमें आरएसएस को "फासीवादी संगठन" के रूप में बताया गया था और इसके उद्देश्यों के बारे में पूछा गया था। इस सवाल ने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया और इसे पक्षपातपूर्ण और अनुचित माना गया।

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सोशल मीडिया पर सवाल की तस्वीरें फैलने के बाद, विभिन्न समूहों और व्यक्तियों ने यूपीपीएससी से कार्रवाई की मांग की। आयोग ने तुरंत जांच शुरू की और प्रोफेसर को परीक्षा प्रक्रिया से पूरी जिन्दगी के लिए हटा दिया। यूपीपीएससी के एक अधिकारी ने कहा, "हमने शिकायतों को गंभीरता से लिया और प्रोफेसर को ड्यूटी से प्रतिबंधित कर दिया। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है, और उचित कार्रवाई की जाएगी।"

प्रोफेसर ने अपने बचाव में कहा कि सवाल का मकसद छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता का परीक्षण करना था, न कि किसी संगठन को बदनाम करना। हालांकि, उनके इस दावे को ज्यादा समर्थन नहीं मिला। इस बीच, आरएसएस समर्थकों ने इस घटना की निंदा की और इसे संगठन के खिलाफ "राजनीतिक साजिश" करार दिया।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब यूपीपीएससी पहले से ही भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आलोचना का सामना कर रहा है। आयोग ने कहा कि वह परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

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विपक्ष का कहना है कि यूपी में दक्षिणपंथी समूह अब आरएसएस या उससे जुड़े संगठन की आलोचना होने पर फौरन हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। हाल ही में राणा सांगा-बाबर विवाद में करणी सेना ने एक दलित सपा सांसद रामजी लाल सुमन के आगरा स्थित आवास पर हमला किया था। लिंचिंग की घटनाएं तो समुदाय विशेष के खिलाफ चल ही रही हैं।
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क़मर वहीद नक़वी
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