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नशे के खिलाफ पंजाब में बुधवार को रैली हुई

पंजाबः आप सरकार नशे के खिलाफ लड़ने चली है लेकिन न रणनीति है न डेटा

पंजाब में नशे के खिलाफ बिना किसी रणनीति के लड़ाई छेड़ी गई है। राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है। इस पार्टी का यह चुनावी वादा था कि वो पंजाब से नशे को खत्म करेगी। दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद आप प्रमुख केजरीवाल को यह वादा याद आ गया और वो नशे के खिलाफ आंदोलन छेड़ने पंजाब आ गए। पंजाब में बुधवार को नशे के खिलाफ 'युद्ध नशे विरुद्ध' रैली का आयोजन हुआ। जिसमें जगह-जगह स्कूलों, कॉलेजों के छात्रों ने रैली में हिस्सा लिया। ऐसी ही एक रैली को पंजाब के सीएम भगवंत मान और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल को रवाना किया।

पंजाब में नशे के खिलाफ जंग आसान नहीं है। इस समस्या से निपटने के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, डॉक्टरों की कमी और आंकड़ों का अभाव इस समस्या को और जटिल बना रहा है। हकीकत यह है कि राज्य में नशे की लत से निपटने के लिए जरूरी संसाधनों और रणनीति की भारी कमी है, जिसके चलते यह संकट गहराता जा रहा है।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में नशामुक्ति केंद्रों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति दयनीय है। कई केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और दवाइयों की कमी है। इसके अलावा, इन केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और मनोचिकित्सकों की भारी कमी देखी गई है। एक अनुमान के मुताबिक, राज्य में नशे की लत से जूझ रहे लगभग 10 लाख लोगों में से केवल 2.62 लाख सरकारी केंद्रों में इलाज करवा रहे हैं, जबकि निजी केंद्रों में 6.12 लाख मरीज हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश केंद्र नियमों का पालन नहीं करते और मरीजों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें आम हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नशे के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए सटीक आंकड़े जरूरी हैं, लेकिन पंजाब में डेटा संग्रहण की कोई व्यवस्थित प्रणाली नहीं है। इससे नीति-निर्माण और संसाधन आवंटन में बाधा आ रही है। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह ने विधानसभा में स्वीकार किया कि राज्य में नशे की समस्या बहुत गंभीर है, लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है। वहां नशा रोकने वाली समितियां स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन का सहयोग न मिलने से इनके प्रयास नाकाम हो रहे हैं। एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा, "हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जब पुलिस पकड़े गए तस्करों को छोड़ देती है, तो हमारा सारा प्रयास बेकार हो जाता है।"

पंजाब की इस जंग में नशे की आपूर्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं, लेकिन मांग को कम करने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं किया जाता, डॉक्टरों की भर्ती नहीं की जाती और डेटा संग्रहण को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक यह लड़ाई अधूरी रहेगी।
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पंजाब की सत्ता में आम आदमी पार्टी लंबे समय से सत्ता में है। लेकिन वो पंजाब में नशा फैलने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार मानती है। आप प्रमुख केजरीवाल ने बुधवार 2 अप्रैल को नशे के लिए पिछली कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। 
केजरीवाल ने कहा- यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछली सरकारों ने चंद रुपयों के लिए राज्य के हर घर में नशे को पहुंचा दिया है, लेकिन आप इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। लेकिन वो यह कहना भी नहीं भूले कि "अब सरकार और पुलिस अकेले इस अभियान को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे और इसके लिए बच्चों सहित हर नागरिक की मदद की जरूरत है। अगर उन्हें किसी ड्रग तस्कर के बारे में पता चलता है, तो वे हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।"

रिपोर्ट और संपादनः यूसुफ किरमानी
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क़मर वहीद नक़वी
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