पंजाब कांग्रेस में लगातार उथल-पुथल मचाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर निशाना साधा है। सिद्धू ने कहा है कि चुनाव से पहले लॉलीपाप बांटे जा रहे हैं। सोमवार को ही चन्नी ने बिजली की दरों में कटौती की थी और सरकारी मुलाजिमों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाने का एलान किया था।
सिद्धू हिंदू महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। सिद्धू के इस ताज़ा बयान से पता चलता है कि वह मुख्यमंत्री न बनाए जाने से नाराज़ हैं। बीते कुछ दिनों में वह कई बार अपनी नाराज़गी का इजहार कर चुके हैं।
सिद्धू ने कहा, “राजनेता लॉलीपॉप देते हैं। ये ले लो, वो ले लो, जो बीते दो महीने में हुआ है। राजनीति अब प्रोफ़ेशन बन गई है और यह अब एक मिशन नहीं रह गई है। मेरा लक्ष्य है कि राजनेताओं से लोगों का जो भरोसा ख़त्म हो गया है, उसे वापस लाया जाए।”

चन्नी से दूरी
बीते दिनों भगवान वाल्मीकि की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सिद्धू नहीं आए थे। जबकि मुख्यमंत्री चन्नी सहित सरकार के कई मंत्री, पार्टी नेता, कार्यकर्ता इसमें मौजूद रहे थे। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री चन्नी के बेटे की शादी थी, इसमें भी कांग्रेस के तमाम मंत्री और नेता शामिल हुए थे लेकिन सिद्धू नहीं आए।
राहुल ने बुलाया था
सिद्धू की तमाम गुस्ताखियों के बाद भी पार्टी हाईकमान ने उन्हें बुलाया था, ख़ुद राहुल गांधी उनसे मिले थे और राहुल से मुलाक़ात के बाद ही सिद्धू ने कहा कि उनके सारे मुद्दे हल हो गए हैं। लेकिन अगले ही दिन उन्होंने 13 बिंदुओं वाला एक पत्र ट्विटर पर जारी कर दिया था।
शांत नहीं होंगे सिद्धू?
सिद्धू के तेवरों को देखकर नहीं लगता कि वे जल्दी शांत होंगे। अगर शांत हो भी गए तो पंजाब चुनाव में टिकट बंटवारे में सिर्फ़ अपनी चलाने की कोशिश करेंगे। सिद्धू को पहले अमरिंदर सिंह से दिक्क़त थी, अब चन्नी से है। उनकी टीस यही है कि उन्हें मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया। एक वीडियो में वे इस बात को कह भी चुके हैं।
अब यह कांग्रेस हाईकमान के लिए भी मुश्किल होता जा रहा है कि वह सिद्धू को किस तरह क़ाबू करे। चुनाव मुंह के सामने आ गए हैं लेकिन प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर होने के बाद भी सिद्धू पार्टी के लिए काम करने के बजाए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
अपनी राय बतायें