बरसों पहले केसर की एक छोटी सी पोटली हमारे छोटे से घर की रसोई में कई दिन और महीने तक अपनी खुशबू बिखेरती रही। लाल-कत्थई रंग की वह‌ सुंदर सी पोटली हमारे लिए वरिष्ठ लेखिका पद्मा सचदेव लेकर आई थीं। यह क़रीब बीस-पच्चीस साल पुरानी बात है।