केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को केंद्रीय कैबिनेट से हटाने की मांग को लेकर लखीमपुर में किसानों का धरना जारी है। किसानों ने गुरुवार सुबह 11 बजे संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में धरना शुरू किया था और यह 75 घंटे तक चलेगा। धरने में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही पंजाब, हरियाणा से भी बड़ी संख्या में किसान पहुंचे हैं।
किसानों की मांग है कि मोदी सरकार जल्द से जल्द अजय मिश्रा टेनी को मंत्रिमंडल से हटाए।
याद दिला दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर चले आंदोलन की अगुवाई संयुक्त किसान मोर्चा ने की थी। इसके बाद मोदी सरकार को बैकफुट पर आते हुए कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था।
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बता दें कि अजय मिश्रा टेनी लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अभियुक्त आशीष मिश्रा के पिता हैं। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी जिसमें 4 किसान भी शामिल थे।
किसानों के साथ ही बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं शुभम मिश्रा, श्याम सुंदर निषाद और हरि ओम मिश्रा की भीड़ ने जान ले ली थी। एक पत्रकार की भी मौत इस घटना में हुई थी।
किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी गई थी जिसके बाद पूरे देश भर में बीजेपी और अजय मिश्रा टेनी का जबरदस्त विरोध हुआ था।
किसानों और विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से तब भी मांग की थी कि टेनी को केंद्रीय कैबिनेट से हटाया जाए लेकिन मोदी सरकार ने उन्हें कैबिनेट में बनाए रखा। हालांकि बीजेपी इस बात को जानती थी कि अगर टेनी चुनावी सभाओं में दिखाई दिए तो इससे पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है इसलिए उत्तर प्रदेश के चुनाव में पूरे प्रचार के दौरान टेनी किसी भी चुनावी मंच पर नहीं आए।
किसानों की यह भी मांग है कि लखीमपुर के तिकोनिया में हुई हिंसा के दौरान पुलिस ने जिन 4 किसानों को जेल में बंद रखा है उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए।
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भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि केंद्र सरकार को टेनी को बर्खास्त करना चाहिए क्योंकि कोई भी मुजरिम देश का गृह राज्य मंत्री नहीं हो सकता। याद दिलाना होगा कि कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में जोरदार आंदोलन चला था और मोदी सरकार को बैकफुट पर आते हुए कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था।
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने टेनी को बर्खास्त करने की मांग को लंबे वक्त तक उत्तर प्रदेश में मुद्दा बनाए रखा था। लखीमपुर खीरी कांड में एसआईटी की रिपोर्ट के आने के बाद बीजेपी बुरी तरह घिर गई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि किसानों की हत्या के पीछे सोची-समझी साजिश थी।
आशीष मिश्रा की जमानत रद्द
इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी और सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ी टिप्पणियां की थी। इस साल फरवरी में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष मिश्रा को जमानत दे दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी ज़मानत रद्द कर दी थी। इसके बाद आशीष मिश्रा को आत्मसमर्पण करना पड़ा था।
क्या मोदी सरकार इस बार किसानों के आंदोलन के बाद टेनी को मंत्रिमंडल से हटाएगी?
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