My dear sisters and brothers from other states,
— M.K.Stalin (@mkstalin) February 27, 2025
Ever wondered how many Indian languages Hindi has swallowed? Bhojpuri, Maithili, Awadhi, Braj, Bundeli, Garhwali, Kumaoni, Magahi, Marwari, Malvi, Chhattisgarhi, Santhali, Angika, Ho, Kharia, Khortha, Kurmali, Kurukh, Mundari and… pic.twitter.com/VhkWtCDHV9
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स्टालिन ने पूछा कि क्या उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में गैर-हिंदी साइनबोर्ड लगाए गए थे। जबकि वहां देशभर से लोगों के आने का दावा किया गया था।
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अगर देश की भाषाई विविधता के लिए सम्मान नहीं है, तो वह बहुप्रचारित 'भारतीय एकता' कहां है?
- एमके स्टालिन, डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री तमिलनाडु 27 फरवरी 2025 सोर्सः एक्स
क्या यह मुद्दा पूरी राजनीतिक है
क्या यह चुनावी रणनीति हैः तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं, जो अभी दूर हैं, लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव और राजनीतिक गहमागहमी इसे पहले से ही चर्चा में ला चुकी है। स्टालिन का यह रुख उनकी पार्टी की कोर विचारधारा—द्रविड़ अस्मिता और हिंदी विरोध—को मजबूत करता है, जो उनके वोटर आधार को एकजुट रखने का काम कर सकता है। साथ ही, केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमला करके वे विपक्षी गठबंधन (INDIA) के हिस्से के रूप में अपनी स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं।
हालांकि, इसे पूरी तरह चुनावी मुद्दा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि यह तमिलनाडु की राजनीति में एक पुराना और गहरा मसला है, जो समय-समय पर उभरता रहा है। बीजेपी की स्थिति को देखें तो वह तमिलनाडु में इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से दबाव में दिखती है। राज्य में उसकी सीमित पैठ को देखते हुए, बीजेपी इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्टालिन को पत्र लिखकर कहा कि किसी भी भाषा को थोपने का कोई इरादा नहीं है और नई शिक्षा नीति छात्रों के हित में है। लेकिन स्टालिन के आक्रामक रुख ने बीजेपी को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है, खासकर जब वह दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष यह है कि स्टालिन इस मुद्दे को तमिल अस्मिता से जोड़कर जरूर उठा रहे हैं, जो उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह विशुद्ध रूप से चुनावी नहीं है, बल्कि उनकी पार्टी की मूल विचारधारा से जुड़ा है। दूसरी ओर, बीजेपी बचाव की मुद्रा में जरूर है, क्योंकि वह इस विवाद को बढ़ने से रोकना चाहती है, लेकिन अभी तक उसका जवाब स्टालिन के हमले को पूरी तरह बेअसर नहीं कर पाया है। यह मुद्दा आगे कैसे बढ़ेगा, यह दोनों पक्षों की अगली चाल पर निर्भर करेगा।
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