गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पार्टी संगठन को चुस्त-दुरुस्त करते हुए 7 नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी है। पार्टी के 7 नेताओं को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इनमें एक प्रमुख नाम वडगाम के विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी का भी है। गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं और बीजेपी यहां दो दशक से ज्यादा वक्त से लगातार सत्ता में है।
कांग्रेस ने जिन नेताओं को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है उनमें विधायक ललित कागथारा, रुत्विक मकवाना, अंबरीश जे डेर, हिम्मत सिंह पटेल, कादिर पीरजादा और इंद्रविजय सिंह गोहिल का नाम शामिल है। इनमें से 5 नेता विधायक हैं।
2017 का विधानसभा चुनाव
आज़ादी के बाद लंबे समय तक गुजरात की सत्ता में रही कांग्रेस 90 के दशक में बीजेपी के उभार और 2000 में नरेंद्र मोदी के राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद कमजोर होती चली गई। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने पार्टी के लिए जमकर पसीना बहाया और सीटों की संख्या में इजाफ़ा किया। 2012 में कांग्रेस को जहां 61 सीटें मिली थीं, वहीं 2017 में यह आंकड़ा 77 हो गया था, दूसरी ओर बीजेपी 2012 में मिली 115 सीटों के मुक़ाबले 2017 में 99 सीटों पर आ गयी थी।
तब यह माना गया था कि पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के आंदोलन से बीजेपी को ख़ासा नुक़सान हुआ है। 2017 के विधानसभा चुनाव में हालात ऐसे थे कि ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात में कई चुनावी रैलियां करनी पड़ी थीं और उन्होंने दिल्ली का कामकाज छोड़कर पूरा फ़ोकस गुजरात चुनाव पर कर दिया था।
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फिर भी 182 सीटों वाली गुजरात की विधानसभा में बहुमत के लिए ज़रूरी 92 सीटों से सिर्फ 7 ही ज़्यादा सीटें बीजेपी ला पाई थी।
सौराष्ट्र के इलाक़े में तब कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था। इस इलाक़े में पाटीदारों (पटेलों) की अच्छी आबादी है और बड़ी संख्या में पाटीदारों ने बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट डाला था। इसके पीछे बड़ा कारण हार्दिक ही थे। लेकिन इस बार हार्दिक पटेल कांग्रेस के साथ नहीं हैं और बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
2017 के बाद से हार्दिक पटेल के अलावा कांग्रेस के कई विधायक और बड़े नेता अब तक पार्टी छोड़ चुके हैं। हार्दिक को भी प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था।
दिल्ली में हुई बैठक
गुजरात के एआईसीसी प्रभारी रघु शर्मा, गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जगदीश ठाकोर, विपक्ष के नेता सुखराम राठवा, वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवाडिया, दीपक बाबरिया सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बीते सोमवार को नई दिल्ली में स्थित पार्टी मुख्यालय में बुलाया गया, जहां गुजरात के नेताओं और एआईसीसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच लंबी बैठक हुई।
बैठक में एआईसीसी महासचिव प्रियंका गांधी के अलावा केसी वेणुगोपाल, अजय माकन, मुकुल वासनिक, रणदीप सिंह सुरेजवाला और जयराम रमेश मौजूद थे।
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, गुजरात कांग्रेस के नेताओं ने बताया कि यह बैठक 4 घंटे से ज्यादा वक्त तक चली और इस दौरान पार्टी के नेताओं से विधानसभा चुनाव से पहले उनकी क्या रणनीति है, इस बारे में प्रजेंटेशन मांगा गया। गुजरात कांग्रेस के नेताओं से पंजाब और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भी उनका फीडबैक मांगा गया।
बैठक के बाद गुजरात कांग्रेस के प्रभारी रघु शर्मा ने कहा कि पार्टी अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम चुनाव के बाद घोषित करेगी।
आप, एआईएमआईएम भी मैदान में
गुजरात में इस बार आम आदमी पार्टी भी चुनाव लड़ने जा रही है और वह कांग्रेस के वोटों में सेंध लगा सकती है। आम आदमी पार्टी का गुजरात में भारतीय ट्राइबल पार्टी के साथ गठबंधन हो चुका है। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी कुछ सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसलिए कांग्रेस को इनसे भी थोड़ा बहुत चुनौती मिल सकती है।
देखना होगा कि पांच राज्यों के चुनाव में हार से टूट चुकी कांग्रेस क्या गुजरात, हिमाचल प्रदेश के चुनाव में कुछ बेहतर प्रदर्शन कर पाएगी।
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