गुजरात के विधानसभा चुनाव में गोधरा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार चंद्रसिंह राउलजी अपने प्रचार में 2002 के गुजरात दंगे के दौरान हुए बिलकीस बानो के मामले का जिक्र करने से बचते हैं। राउलजी उस जेल एडवाइजरी कमेटी (जेएसी) का हिस्सा थे जिसने बिलकीस बानो के मामले में दोषी करार दिए गए 11 अभियुक्तों को रिहा करने का फैसला लिया था।
राउलजी 5 बार गोधरा से विधायक रह चुके हैं और इस बार छठी बार विधायक बनने के लिए जोरदार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।
दोषियों को रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले का जमकर विरोध हुआ था। इस मामले में 6000 से ज्यादा लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर कहा था कि बिलकीस बानो के दोषियों की रिहाई को रद्द कर दिया जाए।
राउल जी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें जिन्होंने कहा था कि जेल में रहने के दौरान दोषियों का आचरण अच्छा था।
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बुधवार को जब बिलकीस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में दोषियों की रिहाई के खिलाफ अर्जी दायर की तब भी राउलजी के पास कई लोगों के फोन आए लेकिन उन्होंने इस बारे में बात नहीं की।
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उन्होंने कहा कि दोषियों की रिहाई के मामले में जेएसी में उनका स्टैंड नियमों के मुताबिक था और जेएसी ने जो सिफारिश की थी वह राज्य की छूट देने वाली नीति के अनुसार थी। वह अपने व्यस्त दिन का हवाला देते हुए आगे के सवालों को टाल देते हैं।
राउलजी 2017 का विधानसभा चुनाव सिर्फ 258 मतों से जीते थे इसलिए इस बार उन्हें चुनाव में जीत हासिल करने के लिए और जोर लगाना पड़ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के स्टार प्रचारक अमित शाह ने कुछ दिन पहले खेड़ा जिले में एक जनसभा में 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र किया था। राउलजी के समर्थन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गोधरा में जनसभा कर चुके हैं।
बिलकीस बानो के साथ 3 मार्च, 2002 को भीड़ द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। दुष्कर्म की यह घटना दाहोद जिले के लिमखेड़ा तालुका में हुई थी। उस समय बिलकीस बानो गर्भवती थीं। बिलकीस की उम्र उस समय 21 साल थी।
बिलकीस बानो के साथ हुए सामूहिक बलात्कार मामले में 11 दोषी जब गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत जेल से बाहर आए थे तो उन्हें रिहाई के बाद माला पहनाई गई थी और मिठाई खिलाई गई थी।
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