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शी जिनफिंग (बायें), ट्रम्प (दायें)

ट्रम्प टैरिफ वॉर गरमायाः 4 मार्च से कई देशों पर लागू, चीन की जबरदस्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की घोषणा से दुनियाभर के शेयर मार्केट गिर गये हैं। ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि मैक्सिकन और कनाडाई वस्तुओं पर उनके प्रस्तावित 25% टैरिफ मंगलवार 4 मार्च से प्रभावी होंगे। इसके अलावा चीन के आयात पर अतिरिक्त 10% टैरिफ भी लगाया जाएगा। क्योंकि वहां से घातक दवाएं अभी भी अमेरिका में आ रही हैं।चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वो ब्लैकमेल न करे। चीन ने अगले हफ्ते कई बैठकें बुलाई हैं, जिनमें अमेरिका को जवाब देने की रणनीति तैयार होगी। 

ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने और कनाडा और मैक्सिको के लिए मंगलवार से लागू होने वाले टैरिफ पर टिके रहने का फैसला किया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा- "चीन, मैक्सिको और कनाडा के साथ बात चल रही है। हमने अवैध इमीग्रेशन मुद्दे पर अच्छी पकड़ बना ली है, लेकिन फेंटेनाइल से मौतों के मुद्दे पर अभी भी हमारी कई चिंताए हैं।" बता दें कि ट्रम्प का आरोप है कि फेंटेनाइल एक ड्रग है, जिसकी सप्लाई चीन से हो रही है। उससे अमेरिका में मौतें हो रही हैं। 

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ट्रम्प की ताजा घोषणा का जवाब चीन ने शुक्रवार 28 फरवरी को दिया। चीन ने अपने बयान में अमेरिका पर "टैरिफ दबाव और ब्लैकमेल" करने का आरोप लगाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि वाशिंगटन ने "टैरिफ दबाव और ब्लैकमेल पर जोर देने के लिए फेंटेनाइल मुद्दे का इस्तेमाल किया है।" टैरिफ के बारे में लिन ने कहा, "इससे उल्टा असर होगा। अमेरिका के साथ चीन के नशीली दवाओं के खिलाफ सहयोग से उल्लेखनीय नतीजे मिले हैं।" उन्होंने कहा कि चीन आधिकारिक तौर पर फेंटेनाइल जैसी ड्रग्स को नियंत्रित करने वाला दुनिया का पहला देश है।

चीन की जवाबी तैयारीः चीन के शीर्ष नेतृत्व ने अगले हफ्ते इस मुद्दे पर बैठक बुलाई है। इसमें ट्रम्प की टैरिफ और व्यापार संबंधी धमकियों से चीन को बचाने के लिए योजना बनाई जाएगी। हालांकि चीन और अमेरिका सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार और रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। लेकिन ट्रम्प के आने के बाद हालात बदल गये हैं। अगले हफ्ते होने वाली बैठकों के दो सत्र बंद कमरे में होंगे।
अर्थशास्त्रियों की निगाहें आगामी बुधवार को बीजिंग में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की बैठक पर है। जहां प्रधानमंत्री ली कियांग 2025 के लिए आर्थिक विकास लक्ष्य तय करेंगे। जिससे यह पता चलेगा कि बीजिंग आने वाले वर्ष के साथ-साथ नए सैन्य खर्च के बारे में कितना आशावादी है। एएफपी ने विश्लेषकों से बात के बाद इस बात पर सहमति जताई कि बीजिंग लगभग पांच फीसदी की वृद्धि का लक्ष्य तय करेगा। 2024 में भी यही लक्ष्य था।

ट्रम्प क्या अमेरिकी बिजनेस को दांव पर लगा रहे हैंः ट्रम्प जिस एजेंडे पर बढ़ रहे हैं, उसने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को उलट दिया है। अपने पहले कार्यकाल की तुलना में ट्रम्प इस बार ज्यादा अप्रत्याशित साबित हो रहे हैं, जिनके बारे में कुछ कहना मुश्किल है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले महीने चीन से आयातित उत्पादों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और अब 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रम्प की मौजूदा धमकी या चेतावनी सैकड़ों अरब डॉलर के व्यापार को प्रभावित कर सकती है। अगर रिपब्लिकन अपनी और अधिक सीमा शुल्क बढ़ाने की धमकी को पूरा करते हैं तो स्थिति और खराब हो सकती है।

ट्रम्प की पिछली घोषणा पर कनाडा और मेक्सिको ने कहा था कि अगर अमेरिका उनके निर्यात पर टैरिफ लगाता है तो वे जवाबी कार्रवाई करेंगे। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा और मेक्सिको के आयात पर टैरिफ को बार-बार रोका है। वैसे भी स्टील और एल्युमीनियम पर संशोधित शुल्क अगले महीने तक लागू नहीं होंगे। इस महीने की शुरुआत में लगाए गए “पारस्परिक” टैरिफ का असर अप्रैल से पहले नहीं दिखेगा। उधर, ट्रम्प ने यूरोपीय संघ पर भी 25% टैरिफ लगाने की कसम खाई है। ट्रम्प का कहना था कि यह गुट यानी यूरोपियन यूनियन को “संयुक्त राज्य अमेरिका को परेशान करने के लिए बनाया गया था।” ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि ईयू पर टैरिफ किस तरह के होंगे। लेकिन समझा जाता है कि टैरिफ “आम तौर पर” “कारों और अन्य सभी चीजों पर” लागू किए जाएँगे।

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बहरहाल, टैरिफ़ बढ़ने की संभावना ने ग्लोबल अर्थव्यवस्था को पहले ही उथल-पुथल में डाल दिया है। दुनियाभर में उपभोक्ता महंगाई बढ़ने और टैरिफ लगाए जाने की स्थिति में ऑटो सेक्टर को नुकसान होने की आशंका जता रहे हैं। लेकिन यह सब एकतरफा नहीं है। ज्यादा कीमतों और धीमी ग्रोथ की संभावना ट्रम्प के लिए राजनीतिक झटका पैदा कर सकती है।

(रिपोर्ट और संपादनः यूसुफ किरमानी)
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