क्या असदउद्दीन ओवैसी तमिलनाडु में भी अपनी पार्टी एआईएमआईएम (मजलिस) के उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारेंगे? क्या मजलिस के उम्मीदवारों की वजह से बिहार में तेजस्वी यादव की आरजेडी की तरह स्टालिन की डीएमके के भी वोट कटेंगे? ओवैसी फ़ैक्टर क्या तमिलनाडु में काम करेगा और इससे बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों को फायदा होगा? क्या ओवैसी फैक्टर की वजह से ही अन्ना डीएमके सत्ता में बने रहने में कामयाब होगी?