रविवार, 28 मई ‘सावरकर जयंती’ के दिन नई संसद के उद्घाटन अवसर पर पवित्र ‘सेंगोल’ के साथ-साथ नरेंद्र मोदी ने अपने आपको भी देश के संसदीय इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए स्थापित कर लिया ! आगे आने वाले सालों में मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, हरेक नई हुकूमत स्पीकर की कुर्सी के निकट स्थापित किए गये राजदंड की चमक में मोदी-युग के प्रताप और ताप को महसूस करती रहेगी।
पुरानी संसद अब विपक्ष को सौंप देना चाहिए !
- विचार
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- 29 Mar, 2025
हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वाले सावरकर की जयंती पर सत्ता के कथित हस्तांतरण के प्रतीक ‘सेंगोल’ की प्राण-प्रतिष्ठा संविधानसम्मत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को लेकर अब संदेह पैदा कर रहा है।...वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग कह रहे हैं कि पुरानी संसद आज भी वास्तविक सत्ता हस्तांतरण और इतिहास की गवाह है, इसलिए इतिहास को सुरक्षित रखने के लिए पीएम मोदी विपक्ष को वो बिल्डिंग सौंप सकते हैं।
