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वक्फ बिल: अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही सरकार: खड़गे

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। खड़गे ने बीजेपी पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीनने और उनकी आर्थिक भलाई के लिए काम न करने का आरोप लगाया। यह विधेयक एक दिन पहले ही लोकसभा में पारित हुआ है और अब राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया है। खड़गे ने इसे 'अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बुलडोजर नीति' करार देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

लोकसभा में बिल पास होने का ज़िक्र करते हुए खड़गे ने कहा, '288 मत पक्ष में और 232 विरोध में आए। इसका मतलब है कि इस विधेयक में खामियां और कमियां हैं। सरकार इसे जबरदस्ती पारित करवा रही है। वक्फ का मतलब दान होता है, धन जमा करना नहीं। दान देने वाला मुस्लिम, हिंदू या ईसाई कोई भी हो सकता है। आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं।' 

उन्होंने सरकार से अल्पसंख्यकों के लिए बजट आवंटन और ख़र्च का हिसाब मांगते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में 18,274 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें से 3,574 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए। खड़गे ने तंज कसा, 'यह गरीबों के प्रति उनकी सोच को दिखाता है।' उन्होंने आगे कहा, 'आपने वित्तीय वर्षों में आवंटन को 4700 करोड़ से घटाकर 2608 करोड़ कर दिया। क्या यही उनका कल्याण है? आप उनका बजट काट रहे हैं। यह दिखाता है कि आप अल्पसंख्यकों की आर्थिक भलाई के लिए काम नहीं कर रहे।'

खड़गे ने सरकार पर अल्पसंख्यकों के लिए कई योजनाओं को बंद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'आपने पांच योजनाएं बंद कर दीं- मौलाना आजाद योजना, मुफ्त कोचिंग, छात्रों के लिए समर्थन, मदरसों में शिक्षा प्रदान करने की योजना- ये सब आपने खत्म कर दिया और दावा करते हैं कि आप महिलाओं, पसमांदा और गरीबों के लिए काम कर रहे हैं। कम से कम इन मुद्दों की समीक्षा तो करें।' 

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उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, 'इनकी नीयत ठीक नहीं है। ये वक्फ संपत्तियों को इकट्ठा करेंगे, लैंड बैंक बनाएंगे और पता नहीं उनकी मंशा इसे बड़े कॉरपोरेट्स को देने की है या नहीं। रिजिजू ने आज संसद में हमारे लिए बुफे सिस्टम रखा है, शायद उनके पास जमीन बांटने के लिए भी ऐसा ही सिस्टम हो।'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति के प्रावधान पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा, 'सांसद, पूर्व जज, और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को वक्फ परिषद में नियुक्त किया जाता था और वे मुस्लिम होते थे। अब केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति होगी। क्या तिरुपति ट्रस्ट में कोई मुस्लिम है? राम मंदिर ट्रस्ट में क्या कोई मुस्लिम है? मैं हिंदू हूं, लेकिन वहां दलित भी नहीं हैं। कई मंदिरों में अनुसूचित जातियां ट्रस्ट में नहीं हैं। आप हर जगह घुसपैठ कर रहे हैं और हर चीज में हस्तक्षेप कर रहे हैं। ये चीजें समाज में फूट डालने का काम करती हैं।'
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खड़गे ने बीजेपी को चेतावनी देते हुए कहा, 'आप मुसलमानों को दबा नहीं सकते। इस विधेयक को वापस लें, इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाएं। हमने संविधान में भी कई संशोधन किए हैं। यह मुसलमानों के लिए अच्छा नहीं है, यह संविधान के खिलाफ है, यह समाज के लिए अच्छा नहीं है। आपको शांति और सद्भाव बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए, इसे बिगाड़ें नहीं।'

मल्लिकार्जुन खड़गे के इस बयान ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष के रुख को और सख्त कर दिया है। उन्होंने इसे न केवल अल्पसंख्यकों के खिलाफ, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताया। 

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क़मर वहीद नक़वी
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