शिवसेना के वरिष्ठ विधायक और कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे के गायब होने के बाद उद्धव सरकार पर संकट गहरा गया है। एकनाथ शिंदे शिवसेना के 11 विधायकों के साथ गुजरात के सूरत में एक होटल में मौजूद हैं। मीडिया में आ रही ख़बरों में विधायकों की संख्या 15 से 20 तक बताई गई है।
एकनाथ शिंदे मंगलवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। सियासी संकट को देखते हुए शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी अपने विधायकों व आला नेताओं के साथ आपात बैठक की है।
महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव के बाद विधान परिषद के चुनाव में भी महा विकास आघाडी सरकार में शामिल दलों के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। इसके बाद ही यह आशंका है कि महा विकास आघाडी सरकार के दलों में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है।
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साल 2019 के नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी और शिवसेना की राहें जुदा हो गई थी। शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ कर विरोधी विचारधारा वाले दलों कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाई थी। इस सरकार को ढाई साल का वक्त पूरा हो चुका है।
लेकिन इस दौरान बीजेपी के कई बड़े नेता दावा करते रहे कि उद्धव सरकार जल्दी गिरने वाली है। तो क्या अब उद्धव सरकार गिर सकती है। इसके लिए महाराष्ट्र की विधानसभा में विधायकों का सियासी गणित क्या है। इस पर नजर डालनी होगी।
288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र की विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 145 विधायक चाहिए। लेकिन शिवसेना के एक विधायक की मौत हो चुकी है जबकि एनसीपी के दो विधायक अनिल देशमुख और नवाब मलिक जेल में हैं। ऐसे में विधानसभा 285 विधायकों की है। इस सूरत में सरकार बनाने के लिए 143 विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी के पास 106 विधायक हैं।
शिवसेना के पास 55 विधायक हैं, एनसीपी के पास 54 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं। यह आंकड़ा 153 बैठता है। छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की संख्या 29 है। महा विकास आघाडी के पास 166 विधायकों का समर्थन है लेकिन अगर एकनाथ शिंदे के साथ शिव सेना के 15 विधायक चले जाते हैं तो यह आंकड़ा 151 रह जाएगा। निर्दलीय व छोटी पार्टियों के 9 विधायक अगर ठाकरे सरकार का साथ छोड़ देते हैं तो यह लगभग तय है कि ठाकरे सरकार के लिए विधानसभा में बहुमत साबित करना मुश्किल हो जाएगा।
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