जेएनयू में पाँच जनवरी को हिंसा से पहले जिस बायोमेट्रिक सिस्टम और सीसीटीवी में तोड़फोड़ के दावे जेएनयू प्रशासन ने किए थे, दरअसल वे झूठे थे। यह बात ख़ुद जेएनयू प्रशासन ने ही मानी है। इसने यह जानकारी तब दी जब आरटीआई से जवाब माँगा गया। यह जवाब विश्वविद्यालय के संचार और सूचना सेवा यानी सीआईएस ने दिया है। इसने जवाब में यह भी कहा है कि सीसीटीवी में तोड़फोड़ नहीं होने के बावजूद हिंसा के दिन जेएनयू मेन गेट पर दोपहर से रात 11 बजे तक की सीसीटीवी फ़ुटेज मौजूद नहीं है। नेशनल कैंपेन फ़ॉर पीपल्स राइट के सदस्य सौरव दास ने आरटीआई से जानकारी माँगी थी।