राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी बुधवार को सपा के दिग्गज नेता आज़म खान के परिवार से मिलने रामपुर पहुंचे। इस मुलाकात के बाद कई तरह की सियासी अटकलें उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगने लगी। बीते दिनों आज़म खान के कई समर्थकों की ओर से सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ नाराजगी का खुलकर इजहार किया गया था और अभी भी ऐसा होना जारी है।
इसके बीच जयंत के आज़म के परिवार से मिलने पहुंचने से पहली बात तो यह सामने आई कि क्या जयंत चौधरी आज़म के परिवार को मनाने के मकसद से रामपुर पहुंचे हैं। आज़म खान लंबे वक्त से जेल में हैं इसलिए जयंत चौधरी की मुलाकात उनके बेटे और विधायक अब्दुल्लाह आज़म और उनकी पत्नी से हुई।
दबाव में हैं अखिलेश!
विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिस तरह सपा-रालोद गठबंधन को बड़ी कामयाबी मिलने और बीजेपी का सूपड़ा साफ होने की बातें कही जा रही थी वैसा कुछ भी नहीं हुआ। इसके बाद पहले शिवपाल यादव के बीजेपी में जाने की अटकलें फिर मोहम्मद आज़म खान के समर्थकों की नाराजगी के कारण अखिलेश यादव दबाव में आते दिखे हैं।
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चंद्रशेखर से मिले थे
जयंत चौधरी ने कुछ दिन पहले भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर से भी मुलाकात की थी। दोनों नेता एक दलित युवक की मौत के मामले में साथ-साथ राजस्थान भी गए थे। जबकि चंद्रशेखर ने विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ा था। लेकिन जयंत चौधरी का चंद्रशेखर से नजदीकी बढ़ाना किसी के गले नहीं उतरा था।
जयंत चौधरी की अब्दुल्लाह आज़म के साथ मुलाकात को लेकर भी अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने जयंत को अब्दुल्लाह आज़म से मिलने नहीं भेजा है। आज़म के समर्थकों की नाराजगी को लेकर अखिलेश ने कहा था कि इस तरह की बातें 2 महीने पहले क्यों नहीं की गई।
जयंत चौधरी की इस ताजा मुलाकात के बाद एक चर्चा यह भी सामने आई है कि क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी अपनी अलग सियासी पहचान बनाना चाहते हैं।
राजनीतिक गठजोड़
ऐसी चर्चा है कि जाट बिरादरी से आने वाले जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ताकतवर जाट, मुसलिम और दलित राजनीति का गठजोड़ खड़ा करना चाहते हैं। जयंत की जाट समाज में, चंद्रशेखर आजाद की दलित समाज में जबकि मोहम्मद आज़म खान और उनके परिवार की मुस्लिम समुदाय पर अच्छी पकड़ है। तीनों ही नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।
आज़म तो कई बार विधायक, कैबिनेट मंत्री और सांसद रह चुके हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बाहर पूरे उत्तर प्रदेश में उनकी टक्कर का मुस्लिम नेता सपा या किसी अन्य राजनीतिक दल के पास नहीं है।
ऐसे में बीजेपी से लड़ने और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी स्थिति को मजबूत करने के लिए जयंत चौधरी चंद्रशेखर आजाद और आज़म खान के साथ मिलकर कोई नई सियासी शुरुआत कर सकते हैं।
हालांकि अभी यह सब अटकलें ही हैं और देखना होगा कि इस तरह की क्या कोई सियासी सूरत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनेगी या फिर समाजवादी पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक-ठाक हो जाएगा।
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