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वक्फ बिल अब राज्यसभा में - क्या है वहां का गणित?

वक्फ बिल लंबी खींचतान के बाद और लोकसभा में तेरह घंटों की लंबी बहस के बाद आखिरकार आधी रात को पास हो गया। इस बिल के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विरोध में 232 वोट। अब ये मामला राज्यसभा में है। बिल को कानून बनने के लिए राज्यसभा में पास होना बेहद जरूरी है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सरकार के पास राज्यसभा में इसे पारित करने के लिए बहुमत है? आइए, राज्यसभा का गणित समझते हैं।
बुधवार को लोकसभा में इस बिल पर लंबी बहस हुई। सरकार ने दलील दी कि अगर ये संशोधन नहीं किए गए, तो दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत संसद भवन समेत कई संपत्तियां आ सकती थीं। सरकार ने पिछली सरकारों पर वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन का आरोप लगाया और कहा कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त होती, तो मुस्लिम समुदाय और देश की समृद्धि में बड़ा बदलाव आ सकता था। लेकिन विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। 
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उनका कहना था कि सरकार इस बिल के जरिए अल्पसंख्यकों की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है। विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये कानून वक्फ संपत्तियों पर सरकार की पकड़ मजबूत करने की कोशिश है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय को नुकसान होगा।
गौर करने वाली बात ये है कि विपक्ष ने इस बिल में सौ से ज्यादा संशोधन सुझाए थे, लेकिन वोटिंग के दौरान इन सभी को खारिज कर दिया गया। अब सारा दारोमदार राज्यसभा पर है। तो क्या सरकार के पास राज्यसभा में नंबर पूरे हैं?
कितना आसान है राज्यसभा में रास्ता?राज्यसभा में बिल को पास करने के लिए सरकार को 119 मतों की जरूरत होगी। इस वक्त सत्तारूढ़ एनडीए के पास 125 मतों का समर्थन है, जो बहुमत से 6 ज्यादा है। वहीं, विपक्ष के पास 95 मत हैं। लेकिन कहानी में ट्विस्ट ये है कि 16 सांसद का रुख क्या रहता है। एनडीए के पास कुल 125 मत हैं। इसमें बीजेपी के 98, जेडीयू के 4, एनसीपी के 3, टीडीपी के 2, जेडीएस का 1, शिवसेना का 1, आरपीआई (ए) का 1, एजीपी का 1, आरएलडी का 1, यूपीपीएल का 1, आरएलएम का 1, पीएमके का 1, टीएमसी-एम का 1, एनपीपी का 1, निर्दलीय 2 और नामांकित 6 सदस्य शामिल हैं।
वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के पास 95 मत हैं। इसमें कांग्रेस के 27, टीएमसी के 13, डीएमके के 10, आप के 10, सपा के 4, वाईएसआरसीपी के 7, आरजेडी के 5, झामुमो के 3, सीपीआई (एम) के 4, सीपीआई के 2, आईयूएमएल के 2, एनसीपी (पवार गुट) के 2, शिवसेना (यूबीटी) के 2, एजीएम का 1, एमडीएमके का 1, केसीएम का 1 सदस्य हैं। इन्हें एक निर्दलीय का समर्थन भी हासिल है।
अब बात उन 16 सांसदों की जो अभी संशय में हैं। इसमें बीआरएस के 4, बीजेडी के 7, एआईएडीएमके के 4 और बसपा का 1 मत शामिल है। इस वक्त गणित एकदम सरकार के पक्ष में दिख रहा है। लेकिन विपक्ष को उम्मीद है कि इन 16 में से कुछ सांसद उनके साथ आ सकते हैं। खास तौर पर बीजेडी, बीआरएस, एआईएडीएमके और बसपा के सांसद विपक्ष के साथ हो सकते हैं।
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यहां संभावनाओं का खेल शुरू होता है। सरकार के समर्थक कुछ सांसद अनुपस्थित हो जाएं और ये अनिर्णीत सांसद विपक्ष का साथ दे दें तो संभव है  कि बिल के पारित होने में अड़चन आ सकती है। संभावना तो दूसरी तरफ भी बनती है। संशयग्रस्त सांसद भी एनडीए के पक्ष में वोट कर सकते है। फिलहाल बिल का पास होना लगभग तय है। विपक्ष अगर इन सांसदों को अपने पक्ष में ले भी आए जो भी वे 119 की निर्णायक संख्या से पीछे ही रहेंगे। 
हालांकि यह तय ही है कि राज्य सभा में वक्फ बिल को पास होने के लिए जितना बहुमत चाहिए, सरकार के पास मौजूद है। वक्फ बिल के पास होने को सरकार अपने लिए बड़ी जीत की तरह देख सकती हैं।  राज्यसभा का गणित पूरी तरह से सरकार के पक्ष में है।
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क़मर वहीद नक़वी
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