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ट्रंप ने भारत पर 26% टैरिफ लगाया, कई एशियाई देशों से कम, क्या असर होगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत सहित कई देशों पर पारस्परिक शुल्क (reciprocal tariffs) लगाने की घोषणा की। उन्होंने इसे "आर्थिक आजादी की घोषणा" करार दिया। भारत पर 26% शुल्क लगाया गया है, जो चीन पर 34%, वियतनाम पर 46%, थाईलैंड पर 36% और इंडोनेशिया पर 32% की तुलना में कम है। इस कदम से अमेरिकी बाजार में बड़े निर्यातक देशों और प्रतिस्पर्धियों पर निशाना साधा गया है। व्हाइट हाउस ने कहा कि ये शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में "मेक अमेरिका वेल्थी अगेन" कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने भारत को "बहुत सख्त" देश बताते हुए कहा, "भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन वे हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे। वे हमसे 52% शुल्क लेते हैं, जबकि हम उनसे लगभग कुछ भी नहीं लेते।" ट्रंप ने दावा किया कि उनकी नीति "उदार" है, क्योंकि वे अन्य देशों द्वारा अमेरिकी निर्यात पर लगाए गए टैरिफ का सिर्फ आधा हिस्सा ही वसूल रहे हैं।

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इस नीति के तहत, भारत पर लगाया गया 26% शुल्क जापान पर 24%, दक्षिण कोरिया पर 25%, मलेशिया पर 24%, यूरोपीय संघ पर 20% और ब्रिटेन पर 10% से अधिक है। हालांकि, वियतनाम पर 46%, कंबोडिया पर 49% और लाओस पर 48% जैसे उच्च शुल्कों की तुलना में भारत पर कम बोझ डाला गया है। ट्रंप ने कहा, "अगर आप चाहते हैं कि आपका टैरिफ शून्य हो, तो अपने उत्पाद अमेरिका में बनाएं, क्योंकि वहां कोई शुल्क नहीं है।"

विभिन्न देशों पर लगे ट्रंप टैरिफ पर एक नज़र

trump imposes 26 percent reciprocal tariffs on india - Satya Hindi

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि दशकों से अमेरिका ने अन्य देशों के लिए व्यापारिक बाधाएं कम कीं, जबकि इन देशों ने अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क और गैर-मौद्रिक बाधाएं लगाईं। उन्होंने कहा, "गैर-मौद्रिक बाधाएं कई मामलों में मौद्रिक बाधाओं से भी बदतर थीं। अब हम अपने लोगों को पहले रखेंगे।"

भारत पर प्रभावः USTR की रिपोर्ट में भारत की ऊंची शुल्क दरों की आलोचना की गई थी, जिसमें वनस्पति तेल, सेब, मक्का, मोटरसाइकिल, ऑटोमोबाइल, फूल, प्राकृतिक रबर, कॉफी, किशमिश, अखरोट और मादक पेय जैसे उत्पाद शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की विश्व व्यापार संगठन (WTO) से बंधी और लागू शुल्क दरों के बीच अंतर सरकार को अप्रत्याशित रूप से शुल्क समायोजित करने की अनुमति देता है, जिससे अमेरिकी हितधारकों के लिए अनिश्चितता पैदा होती है। 2019/2020 और 2020/2021 के बजट में भारत ने क्रमशः 70 और 31 उत्पाद श्रेणियों पर शुल्क बढ़ाया था, जिसमें अमेरिकी निर्यात शामिल थे।

रिपोर्ट में भारत के दूध, सूअर के मांस और मछली उत्पादों के आयात नियमों पर भी सवाल उठाया गया, जिसमें आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) मुक्त प्रमाणपत्र की आवश्यकता को "वैज्ञानिक या जोखिम-आधारित औचित्य के बिना" बताया गया। भारत सरकार ने अभी तक इस घोषणा पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली कई स्थितियों का विश्लेषण कर रही है ताकि इन शुल्कों के प्रभाव का आकलन किया जा सके।

बाकी देशों की तुलना में भारत की स्थितिः हालांकि भारत पर 26% शुल्क एक चुनौती है, लेकिन यह उसके एशियाई प्रतिस्पर्धियों—चीन (34%), वियतनाम (46%), थाईलैंड (36%) और इंडोनेशिया (32%)—की तुलना में कम है। ये देश चीन से भारी निवेश प्राप्त कर रहे हैं और चीनी सप्लाई चेन के साथ एकीकृत हो रहे हैं। इससे भारत को व्यापार में कुछ लाभ मिल सकता है, क्योंकि अमेरिकी बाजार में इसके प्रतिस्पर्धियों पर अधिक दबाव होगा।

ग्लोबल कारोबार पर असर

ट्रंप ने इस कदम को "अमेरिकी श्रमिकों के लिए खड़ा होना" बताया और कहा कि यह नीति अमेरिकी मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी। उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सभी आयातित कारों पर 25% शुल्क और सभी अमेरिकी आयात पर 10% आधारभूत शुल्क शामिल है। ये शुल्क 5 अप्रैल से लागू होंगे, जबकि देश-विशिष्ट उच्च शुल्क 9 अप्रैल से प्रभावी होंगे।

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विश्लेषकों का मानना है कि यह नीति ग्लोबल व्यापार में उथल-पुथल मचा सकती है। भारत के लिए, जो अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, यह शुल्क कृषि, वस्त्र और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने और अमेरिकी फर्मों के साथ संयुक्त उद्यमों पर ध्यान देने की जरूरत होगी।

ट्रंप की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत चल रही है। दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन ये नए शुल्क इस प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं। भारतीय उद्योग अब सरकार से उम्मीद कर रहा है कि वह इस स्थिति से निपटने के लिए त्वरित कदम उठाएगी।

रिपोर्ट और संपादनः यूसुफ किरमानी
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