इस नीति के तहत, भारत पर लगाया गया 26% शुल्क जापान पर 24%, दक्षिण कोरिया पर 25%, मलेशिया पर 24%, यूरोपीय संघ पर 20% और ब्रिटेन पर 10% से अधिक है। हालांकि, वियतनाम पर 46%, कंबोडिया पर 49% और लाओस पर 48% जैसे उच्च शुल्कों की तुलना में भारत पर कम बोझ डाला गया है। ट्रंप ने कहा, "अगर आप चाहते हैं कि आपका टैरिफ शून्य हो, तो अपने उत्पाद अमेरिका में बनाएं, क्योंकि वहां कोई शुल्क नहीं है।"
विभिन्न देशों पर लगे ट्रंप टैरिफ पर एक नज़र

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि दशकों से अमेरिका ने अन्य देशों के लिए व्यापारिक बाधाएं कम कीं, जबकि इन देशों ने अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क और गैर-मौद्रिक बाधाएं लगाईं। उन्होंने कहा, "गैर-मौद्रिक बाधाएं कई मामलों में मौद्रिक बाधाओं से भी बदतर थीं। अब हम अपने लोगों को पहले रखेंगे।"
भारत पर प्रभावः USTR की रिपोर्ट में भारत की ऊंची शुल्क दरों की आलोचना की गई थी, जिसमें वनस्पति तेल, सेब, मक्का, मोटरसाइकिल, ऑटोमोबाइल, फूल, प्राकृतिक रबर, कॉफी, किशमिश, अखरोट और मादक पेय जैसे उत्पाद शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की विश्व व्यापार संगठन (WTO) से बंधी और लागू शुल्क दरों के बीच अंतर सरकार को अप्रत्याशित रूप से शुल्क समायोजित करने की अनुमति देता है, जिससे अमेरिकी हितधारकों के लिए अनिश्चितता पैदा होती है। 2019/2020 और 2020/2021 के बजट में भारत ने क्रमशः 70 और 31 उत्पाद श्रेणियों पर शुल्क बढ़ाया था, जिसमें अमेरिकी निर्यात शामिल थे।
बाकी देशों की तुलना में भारत की स्थितिः हालांकि भारत पर 26% शुल्क एक चुनौती है, लेकिन यह उसके एशियाई प्रतिस्पर्धियों—चीन (34%), वियतनाम (46%), थाईलैंड (36%) और इंडोनेशिया (32%)—की तुलना में कम है। ये देश चीन से भारी निवेश प्राप्त कर रहे हैं और चीनी सप्लाई चेन के साथ एकीकृत हो रहे हैं। इससे भारत को व्यापार में कुछ लाभ मिल सकता है, क्योंकि अमेरिकी बाजार में इसके प्रतिस्पर्धियों पर अधिक दबाव होगा।
ग्लोबल कारोबार पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि यह नीति ग्लोबल व्यापार में उथल-पुथल मचा सकती है। भारत के लिए, जो अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, यह शुल्क कृषि, वस्त्र और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने और अमेरिकी फर्मों के साथ संयुक्त उद्यमों पर ध्यान देने की जरूरत होगी।
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