केंद्र सरकार ने 30 नवंबर 2021 अडानी ग्रीन और एज्योर पावर से बिजली खरीदने वाले राज्यों का ट्रांसमिशन चार्ज जैसे ही माफ किया, उसके 24 घंटे के अंदर सबसे पहले आंध्र प्रदेश सरकार ने 1 दिसंबर 2021 को केंद्रीय सरकार की एजेंसी सेंट्रल यूटिलिटी सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। उस समय आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआरसीपी सरकार थी। एसईसीआई ने अडानी ग्रीन और एज्योर पावर को 12 गीगा वॉट (जीडब्ल्यू) के प्रोजेक्ट आवंटित किए थे। अमेरिका की फेडरल कोर्ट में अडानी समूह के गौतम अडानी और सागर अडानी समेत 7 लोगों पर जो दो अभियोग दर्ज किए गए हैं, उनमें कहा गया है कि इन लोगों ने भारत में सरकारी अधिकारियों को 2000 करोड़ रुपये ज्यादा की महा रिश्वत देकर ऐसे अनुबंध हासिल किए। अडानी समूह ने इस आरोप का खंडन किया है। लेकिन मामला चूंकि अमेरिकी कोर्ट में है तो अडानी समूह के खंडन का कोई महत्व नहीं है। उसका महत्व भारतीय मीडिया के लिए जरूर है।
तेरी मेहरबानियांः अडानी ग्रीन प्रोजेक्ट के लिए ट्रांसमिशन लागत क्यों और कैसे माफ हुई
- देश
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- सत्य ब्यूरो
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- 6 Dec, 2024
अडानी घूस कांड की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने शुक्रवार को इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें तथ्यों के साथ बताया गया है कि किस स्तर पर अनुबंध हुए, केंद्र सरकार की क्या भूमिका थी। आंध्र प्रदेश के बड़े अधिकारी को रिश्वत की कितनी रकम मिली। सत्य हिन्दी पर इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट को प्रकाशित किया जा रहा है। जरूर पढ़िए और जानिए देश में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार मोदी राज में कैसे हुआः

केंद्र सरकार ट्रांसमिशन फीस (अंतर राज्य पारेषण प्रणाली) इसलिए वसूलती है कि उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए ही बिजली एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचती है। जिसका केंद्र सरकार पैसा लेती है। इसीलिए केंद्र सरकार ने राज्यों की ट्रांसमिशन फीस माफ कर दी। लेकिन इसके पीछे मकसद यही था, ताकि राज्य अडानी ग्रीन और एज्योर पावर से सोलर पावर खरीद सकें। आईएसटीएस (अंतर राज्य पारेषण प्रणाली) शुल्क की इस छूट से अनुमान है कि प्रति यूनिट 80 पैसे (प्रति वर्ष 1,360 करोड़ रुपये) की बचत होगी, जिससे एक तरह से राज्य को दो परियोजनाओं से बिजली खरीदने के लिए बढ़ावा मिलेगा।
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