हम दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था जल्द बन जायेंगे. लेकिन जब राष्ट्रीय राजधानी के पड़ोस के एक औद्योगिक शहर में अंडरपास में जलभराव के कारण जब एक बड़े आधुनिक निजी बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारी कार के डूबने से मर जाते हैं तो तमाम सवाल खड़े हो जाते हैं। या जब सेमी-कंडक्टर निर्माण के लिए विदेशी उद्यमियों को लुभाने हेतु आयोजित सभागार में बारिश के बाद पानी टपकने लगता है और कारोबारी सुरक्षित कोना तलाशने लगते हैं तो सोचना पड़ता है कि हम कौन सी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं। या जब वे ट्रैफिक जाम में घंटों फंसे रहते हैं तो अर्थव्यवस्था का कौन सा पायदान याद आता है। सोचिये जब उसी दिन उसी प्रदेश का सीएम ऐलान करता है कि जिसे मस्जिद कहा जाता है वह साक्षात् शिब का मंदिर है तो विकास की प्राथमिकता हीं नहीं परिभाषा पर ही शक होने लगता है।