संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शिक्षा विभाग को समाप्त करने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है। उन्होंने एक और चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह कदम रूढ़िवादी (कंजरवेटिव) समूहों के बीच लोकप्रिय रहा है, जो लंबे समय से तर्क देते आए हैं कि शिक्षा पर फेडरल सरकार का नियंत्रण अनावश्यक है और इसे राज्य सरकारों के हाथ में होना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा विभाग "उदारवादी विचारों" से प्रभावित हो गया है, जो छात्रों के हित में नहीं है। लेकिन इस फैसले की आलोचना भी हो रही है, क्योंकि कई लोगों का मानना है कि इससे देश भर के छात्रों को नुकसान होगा। तो, ट्रम्प ऐसा क्यों कर रहे हैं और इसके बाद क्या होगा?
ट्रम्प और उनके समर्थकों का कहना है कि 1979 में स्थापित शिक्षा विभाग ने पिछले 46 वर्षों में 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए हैं, लेकिन छात्रों की शैक्षिक उपलब्धियों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस के अनुसार, प्रति छात्र खर्च में 245 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के बावजूद, नतीजे संतोषजनक नहीं रहे हैं। ट्रम्प का तर्क है कि यह विभाग नौकरशाही का एक उदाहरण है, जो शिक्षा को बेहतर बनाने के बजाय उसे मुश्किल भरा बनाता है।
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रूढ़िवादी नेताओं का मानना है कि शिक्षा एक स्थानीय और राज्य स्तर का मामला होना चाहिए, न कि फेडरल सरकार का। उनका कहना है कि राज्य अपने छात्रों की जरूरतों को बेहतर समझते हैं और उनके लिए उपयुक्त नीतियां बना सकते हैं। ट्रम्प ने इस कदम को "शिक्षा को राज्यों में वापस लाने" के रूप में पेश किया है, जिसे कई रिपब्लिकन गवर्नरों ने समर्थन दिया है। उदाहरण के लिए, फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस, जो पहले ट्रम्प के प्रतिद्वंद्वी रह चुके हैं, ने भी इस कदम की सराहना की है।
20 मार्च 2025 को व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने इस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, शिक्षा विभाग को पूरी तरह खत्म करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है, जो आसान नहीं होगी। इस आदेश में शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन को विभाग को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने और शिक्षा के अधिकारों को राज्यों को सौंपने का निर्देश दिया गया है। व्हाइट हाउस ने आश्वासन दिया है कि छात्र लोन, पेल ग्रांट और विशेष जरूरतों वाले छात्रों के लिए सहायता जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि विभाग के खत्म होने पर ये सेवाएं कैसे जारी रहेंगी।
डेमोक्रेट्स और शिक्षा समर्थकों ने इस कदम को "राष्ट्रपति की शक्ति का दुरुपयोग" करार दिया है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग गरीब छात्रों, अल्पसंख्यकों और विकलांग बच्चों के लिए समान शिक्षा सुनिश्चित करता है। फंडिंग के जरिए कम आय वाले स्कूलों को सहायता मिलती है। लेकिन इससे IDEA (Individuals with Disabilities Education Act) जैसे कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे लाखों छात्र प्रभावित होंगे, खासकर वे जो फेडरल सरकार की सहायता पर निर्भर हैं।
शिक्षा यूनियनों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। उनका कहना है कि यह कदम न केवल छात्रों को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि संघीय छात्र लोन सिस्टम, जिसमें 1.5 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज और 40 मिलियन से अधिक लोन पाने वाले शामिल हैं, को भी अस्थिर कर सकता है।
हालांकि ट्रम्प का कार्यकारी आदेश एक बड़ा कदम है, लेकिन विभाग को पूरी तरह खत्म करने के लिए कांग्रेस का समर्थन जरूरी है। रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस में इसे मंजूरी मिलने की संभावना है, लेकिन डेमोक्रेट्स और कुछ मॉडरेट रिपब्लिकन इसका विरोध कर सकते हैं। अगर यह योजना सफल होती है, तो शिक्षा विभाग के कई कार्यों को अन्य एजेंसियों, जैसे स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (छात्र लोन) और स्वास्थ्य व मानव सेवा विभाग (विशेष जरूरतें और पोषण कार्यक्रम), को सौंपा जा सकता है।
इसके अलावा, ट्रम्प प्रशासन ने संकेत दिया है कि वे शिक्षा में "वामपंथी प्रभाव" को कम करना चाहते हैं, जैसे डाइवर्सिटी, इक्विटी और इनक्लूजन (DEI) की पहल। समर्थकों का कहना है कि इससे माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा पर अधिक नियंत्रण मिलेगा, जबकि आलोचकों का मानना है कि यह शिक्षा में असमानता को बढ़ाएगा।
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ट्रम्प का शिक्षा विभाग को खत्म करने का फैसला अमेरिकी शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। यह कदम उनके रूढ़िवादी समर्थकों के लिए एक जीत है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम अभी अनिश्चित हैं। कानूनी लड़ाई, कांग्रेस की मंजूरी और सेवाओं के हस्तांतरण जैसे मुद्दे इस प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं।
रिपोर्ट और संपादनः यूसुफ किरमानी
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