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ट्रंप टैरिफः जेपी मॉर्गन ने दी मंदी की चेतावनी, वॉल स्ट्रीट को $5 ट्रिलियन का नुकसान

अमेरिका की प्रमुख वित्तीय फर्म जेपी मॉर्गन ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियां देश को मंदी की ओर धकेल सकती हैं। इसके साथ ही, ट्रंप के टैरिफ ऐलान ने वॉल स्ट्रीट को भारी झटका दिया है, जिसके चलते शेयर बाजार में 5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 420 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान दर्ज किया गया है। इस दोहरे संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरी चिंता पैदा कर दी है, खासकर भारत जैसे देशों के लिए जो अमेरिकी बाजारों से जुड़े हैं।

जेपी मॉर्गन के मुख्य अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल फेरोली ने निवेशकों को एक नोट में बताया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित टैरिफ नीतियां—जिनमें मैक्सिको और कनाडा से आयात पर 25% और चीन से आयात पर 10% टैरिफ शामिल हैं—अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मंदी में धकेल सकती हैं। फेरोली के अनुसार, ये टैरिफ लागू होने से नौकरियों में भारी कटौती होगी, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट आएगी और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलेगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि 2025 के अंत तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में प्रवेश कर सकती है।

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विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजगार और उत्पादन पर पड़ेगा। जेपी मॉर्गन ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ट्रंप की नीतियां पूरी तरह लागू हुईं, तो अगले दो साल में अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ 2% से नीचे जा सकती है, जो ग्लोबल कारोबार के लिए भी खतरे की घंटी है।

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में 'लिबरेशन डे' टैरिफ की घोषणा की थी, जिसे उन्होंने अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति बताया। हालांकि, इस ऐलान का उल्टा असर हुआ। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ की खबर से वॉल स्ट्रीट में भारी बिकवाली शुरू हो गई, जिसके चलते शेयर बाजार से 5 ट्रिलियन डॉलर का मूल्य एक झटके में खत्म हो गया। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में 4-6% की गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों में यह डर फैल गया है कि टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों की सप्लाई चेन प्रभावित होगी और मुनाफा कम होगा। ऑटोमोबाइल, तकनीक और उपभोक्ता सामान जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है। एक बाजार विश्लेषक ने कहा, "यह ट्रंप की आर्थिक नीतियों का पहला बड़ा झटका है, और यह अमेरिका के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट को अस्थिर कर सकता है।"

भारत पर भी असरः अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और इस मंदी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिकी बाजार में मांग कम हुई, तो भारत से होने वाला निर्यात—खासकर सूचना प्रौद्योगिकी, कपड़ा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में—प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट की गिरावट से भारतीय शेयर बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

ट्रंप ने तमाम आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि टैरिफ अमेरिकी नौकरियों को बचाने और घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "हम विदेशी देशों को अमेरिका को लूटने नहीं देंगे। यह मुक्ति का समय है।" हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति उल्टी पड़ सकती है, क्योंकि इससे न केवल अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ेगा, बल्कि ग्लोबल ट्रेड वॉर की भी शुरुआत हो सकती है।

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जेपी मॉर्गन की चेतावनी और वॉल स्ट्रीट के नुकसान ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत को मुश्किल बना दिया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स अब अमेरिकी नीतियों पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इसका असर यूरोप, एशिया और अन्य उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है। भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी इस स्थिति से निपटने के लिए रणनीति तैयार करनी पड़ सकती है।

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क़मर वहीद नक़वी
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