बीएसएनएल की लापरवाही के कारण भारत सरकार को 1800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। क्योंकि बीएलएनल रिलायंस जियो को न बिल दे पाई और न ही पैसा ले पाई। सीएजी की रिपोर्ट ने इस बड़े घोटाले को उजागर किया है। बीएसएनएल की जवाबदेही और प्रबंधन पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय से भी इन कंपनियों के कर्मचारियों की स्थिति सुधरने को नहीं है। एक लाख लोगों की नौकरी ख़तरे में हे, पूरा दूरसंचार उद्योग की स्थिति ही बुरी है।
बीएसएनएल में आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गयी है कि 1.76 लाख कर्मचारियों को फ़रवरी का वेतन तक नहीं मिला है। कंपनी के 18 साल के इतिहास में पहली बार है कि यह समय पर वेतन देने में असमर्थ है।