राहुल गांधी की एक और बड़ी यात्रा की तैयारी है। 'भारत जोड़ो यात्रा' जैसी। पार्टी के महासचिव जायरम रमेश ने रविवार को कहा कि कन्याकुमारी से जम्मू कश्मीर तक की उस यात्रा की सफलता के बाद कांग्रेस अब अरुणाचल प्रदेश के पासघाट से गुजरात के पोरबंद तक इसी तरह के मार्च पर विचार कर रही है। जयराम रमेश ने पीटीआई को बताया कि पूर्व-से-पश्चिम की यात्रा का प्रारूप भारत जोड़ो यात्रा से थोड़ा अलग हो सकता है।
जयराम रमेश ने कहा, 'बहुत उत्साह और ऊर्जा है। मुझे यह भी लगता है कि व्यक्तिगत रूप से इसकी आवश्यकता है, लेकिन पूर्व-से-पश्चिम यात्रा का प्रारूप दक्षिण-से-उत्तर भारत जोड़ो यात्रा के प्रारूप से अलग हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'इसमें ऐसा विस्तृत बुनियादी ढांचा नहीं हो सकता है जो भारत जोड़ो यात्रा के लिए जुटाया गया था और हो सकता है कि कम यात्री हों।'
उन्होंने आगे कहा कि यह काफ़ी हद तक एक पदयात्रा होगी, लेकिन इस मार्ग पर जंगल और नदियाँ हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बहु-मॉडल यात्रा होगी, लेकिन ज़्यादातर यह एक पदयात्रा ही होगी।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस ने रायपुर में अपना पूर्ण अधिवेशन आयोजित किया है। रायपुर में कांग्रेस का अधिवेशन संपन्न हो गया है। कांग्रेस ने इस अधिवेशन में अगले तीन महीने के अभियान की योजना तैयार की है।
तीन महीने के लिए योजना तैयार
कांग्रेस ने सेवादल की शताब्दी मनाने से लेकर कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिज़ोरम, राजस्थान और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव को लेकर भी रणनीति तैयार की। हिंडनबर्ग मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने 6 मार्च को देशभर में एलआईसी और एसबीआई के दफ्तर के बाहर-प्रदर्शन करने का फ़ैसला लिया। कांग्रेस अधिवेशन में 13 मार्च को देश के हर राज्य की राजधानी में मार्च के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी। इसके बाद महारैली आयोजित होगी।
कांग्रेस पार्टी के इस अधिवेशन में अगले तीन महीने के कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया गया। अधिवेशन की समाप्ति के बाद कांग्रेस ने बयान जारी किया है।
बयान में राहुल गांधी की कन्याकुमारी से कश्मीर तक की करीब चार हजार किलोमीटर लंबी पदयात्रा का जिक्र किया गया है। उसमें कहा गया है कि यात्रा ने भारत की एक समावेशी और प्रगतिशील दृष्टि को आगे बढ़ाया है, जहां संवैधानिक मूल्य सर्वोच्च हैं। यात्रा ने विविधता में एकता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया।
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम एकमात्र पार्टी हैं जिसने कभी बीजेपी, आरएसएस से समझौता नहीं किया। इसमें आगे कहा गया, 'हम हमेशा बीजेपी की तानाशाही, साम्प्रदायिक राजनीति और उसके पक्षपातपूर्ण पूंजीवादी आक्रमण के खिलाफ अपने राजनीतिक मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ते रहेंगे।'
कांग्रेस ने समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के साथ मिलकर साझा, रचनात्मक कार्यक्रम के ज़रिए संविधान को बचाने और देश की 'तीन मुख्य चुनौतियों- बढ़ती आर्थिक असमानता, बढ़ता सामाजिक ध्रुवीकरण और गंभीर होती जा रही राजनीतिक तानाशाही' का दृढ़ता से सामना करने की बात कही है।
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कांग्रेस का 85वां पूर्ण अधिवेशन 24 फरवरी को शुरू हुआ था। आज इसके समापन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए भाषण पर तंज कसा। राहुल ने कहा कि श्रीनगर के लाल चौक पर उन्होंने भी झंडा फहराया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को उससे फर्क नहीं दिखा जो उन्होंने खुद फहराया था।
राहुल राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में दिए गए प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के संदर्भ में बोल रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने तब जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में लाल चौक की अपनी यात्रा को याद किया था जहाँ उन्होंने 1991 की अपनी 'एकता यात्रा' के रूप में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। उनका यह भाषण तब आया था जब राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा जम्मू कश्मीर में ही ख़त्म की और लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराया था। संसद में प्रधानमंत्री मोदी के उस तंज का ही आज राहुल ने कांग्रेस के रायपुर अधिवेशन में ज़िक्र कर कहा कि प्रधानमंत्री को वहाँ झंडा फहराने में फर्क नहीं दिखता।
उन्होंने अडानी-हिंडनबर्ग मामले में मोदी सरकार पर हमला करते हुए पूछा, 'संसद में अडानी के बारे में सवाल नहीं पूछा जा सकता है। हम तब तक सवाल पूछते रहेंगे जब तक कि सच्चाई सामने नहीं आ जाती। बीजेपी अडानी को क्यों बचा रही है।'
राहुल ने पूछा कि जिन शेल कंपनियों का इस्तेमाल करोड़ों रुपये की हेराफेरी के लिए किया जा रहा है, वे किसके हैं? कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया, 'मामले की जांच क्यों नहीं हो रही है? यह देश की सुरक्षा का मामला है। अडानी और मोदी एक हैं। और देश का सारा पैसा अडानी के हाथ में है।'
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