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अपनी माता की अस्थियां विसर्जित करने के बाद संगम स्नान करते पंडित जवाहरलाल नेहरू

अंग्रेजों की पाबंदी के बावजूद पंडित नेहरू ने कुंभ में लगाई थी डुबकी

बात 1924 की है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के शहर इलाहाबाद में अर्ध कुंभ का मेला लगा था। पूरे देश से श्रद्धालु संगम के तट पर उमड़ रहे थे। लेकिन अंग्रेज सरकार ने कुंभ स्नान पर पाबंदी लगा दी थी। किसी भी आदमी को संगम में डुबकी लगाने की मनाही थी।

अंग्रेज किसी चीज के लिए मना करें और जवाहरलाल क़ानून का उल्लंघन कर उस काम को ना करें तो फिर काहे के जवाहरलाल।

पंडित मदन मोहन मालवीय और जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में दो ढाई सौ लोगों की टीम संगम के तट पर पहुंच गई। वहां पुलिस का सख्त पहरा था और घुड़सवार पुलिस हाथों में डंडे लिए डुबकी लगाने वालों का सरकारी स्वागत करने के लिए तैयार थी। संगम की रेत पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी कि कोई उसे पार कर गंगा जी तक ना पहुंच सके।

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पंडित नेहरू पंडित मदन मोहन मालवीय और उनकी टीम के सभी लोग गंगा जी की रेत पर बैठकर सत्याग्रह करने लगे। उनके चारों तरफ़ घुड़सवार पुलिस वाले कुछ इस अंदाज में चक्कर लगा रहे थे कि बस किसी भी समय घोड़े उनके ऊपर चढ़ा देंगे और सत्याग्रह का दंभ टूट जाएगा।

जब यह सत्याग्रह चलते काफी समय हो गया तो नेहरू का जोश काबू में ना रहा। एक झटके में वे बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पुलिस के लाठी डंडों की कोई परवाह नहीं की। और उसके बाद मां गंगा में छलांग लगाकर डुबकी लगाई और कुंभ स्नान किया। उसके बाद नेहरू जी शान से वापस आए और फिर से पंडित मालवीय के बगल में आकर सत्याग्रहियों के साथ बैठ गए। नेहरू का यह कारनामा देखकर वृद्ध पंडित मालवीय को भी जोश आ गया और उन्होंने पूरी टीम के साथ स्नान करने का फैसला किया।

इस तरह पंडित मालवीय के साथ एक बार फिर से पंडित नेहरू पुलिस को धता बताते हुए गंगा जी में स्नान करने पहुंचे और दोबारा कुंभ स्नान किया।

इसके अलावा अपनी माता और पिता के निधन के बाद हिंदू रीति रिवाज के अनुसार पंडित नेहरू ने अस्थियों का प्रवाह किया और गंगा स्नान किया।

भारत की आजादी के बाद 1954 में जब पहला कुंभ हुआ तो प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत सभी ने जाकर मौका मुआयना किया और गंगा जी का आचमन किया।

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1954 के कुंभ में भगदड़ मचने के कारण कई लोगों की मृत्यु हुई। लेकिन पंडित नेहरू ने ना तो लाशों को छुपाने की कोशिश की और ना जिम्मेदारी से भागने की कोशिश की।

उन्होंने संसद में बयान दिया और इस घटना के लिए गहरा दुख व्यक्त किया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई जो दुर्घटना के कारण का पता लगाए और इस तरह के सुझाव दे कि आगे से इस तरह की दुर्घटनाएं ना हो सकें।

यही नेहरू का आईडिया ऑफ़ इंडिया है जो अंग्रेजों के खिलाफ बगावत में कुंभ की आस्था को संघर्ष की शक्ति में बदल देता है। यही नेहरू का आईडिया ऑफ़ इंडिया है जो दुर्घटनाओं पर मिट्टी नहीं डालता बल्कि उन्हें स्वीकार करता है और आगे न दोहराने के लिए उपाय अपनाता है।

(पीयूष बबेले के फ़ेसबुक पेज से साभार)
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पीयूष बबेले
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