स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म बुक माय शो ने शनिवार को कुणाल कामरा से जुड़ा सारा कंटेंट अपनी वेबसाइट से हटा दिया और उन्हें अपनी कलाकारों की सूची से डीलिस्ट कर दिया। यह कदम महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर उनके एक विवादास्पद मजाक के बाद उठाया गया, जिसने शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया था। इस घटना ने न केवल कानूनी कार्रवाई को जन्म दिया, बल्कि कुणाल के करियर पर भी गहरा असर डाला है। लेकिन एक कलाकार के साथ हो रही इस तरह की घटनाओं का समर्थन नहीं किया जा सकता। यह अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला है।
मामला तब शुरू हुआ जब युवा शिवसेना के महासचिव राहुल एन. कनाल ने टिकटिंग प्लेटफॉर्म ‘बुक माय शो’ को एक पत्र लिखा। यह पत्र 2 अप्रैल को लिखा गया था, जिसमें राहुल ने कुणाल कामरा के आगामी शो की टिकट बिक्री को तुरंत रोकने की मांग की। राहुल कणाल ने कामरा की एकनाथ शिंदे पर कथित “आक्रामक और अपमानजनक टिप्पणियों की बात करते हुए बुक माय शो से कहा था कि वे कुणाल कामरा के शो की लिस्टिंग हटाएं। मुंबई के खार में स्टूडियो पर हमला करने के आरोपी राहुल कनाल का कहना था कि कामरा का शो सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचा सकता है। यह देश के शीर्ष नेताओं की छवि को धूमिल कर सकती हैं।
ताजा ख़बरें
गौर
करने
वाली
बात
यह
है
कि
खार
स्थित
स्टूडियो
पर
तोड़
फोड़
मचाने
के
आरोपी
राहुल
कनाल
ने
इस
पत्र
को
एक
“चिंतित
नागरिक”
की
हैसियत
से
लिखा
था।
उन्होंने ‘बुक माय शो’ को याद दिलाया कि यह प्लेटफॉर्म पहले भी कामरा के शो के लिए टिकट बेच चुका है। उनके अनुसार, कुणाल कामरा अपने प्रदर्शनों और कंटेंट के जरिए प्रधानमंत्री, उपमुख्यमंत्रियों और अन्य प्रमुख नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
राहुल कनाल ने इसे बेहद निंदनीय करार दिया और इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देना समाज के लिए हानिकारक हो सकता है। ध्यान से देखा जाए तो ‘बुक माय शो’ को उनका यह पत्र न सिर्फ एक मांग थी, बल्कि एक तरह का अल्टीमेटम भी था, जिसने इस पूरे मामले को और तूल दे दिया।
गौरतलब
है
एकनाथ
शिंदे
पर
की
गई
व्यंग्यात्मक
टिप्पणियों
के
साथ
इठा
विवाद
पूरी
तरह
से
सियासी
रंग
पकड़
चुका
है।
इस
पर
राजनीतिक
दबाव
के
साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी तेज हो गई है।
इस वीडियो के बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें 5 अप्रैल को पूछताछ के लिए तलब किया था। लेकिन कामरा ने इस बार भी पुलिस के सामने हाजिर होने से इनकार कर दिया। यह तीसरा मौका था जब वे पुलिस के समन का जवाब देने में नाकाम रहे। इससे पहले शिवसेना विधायक मुरजी पटेल की शिकायत पर खार पुलिस ने उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया था। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। 22 मार्च की रात को कामरा द्वारा शूट किए गए उसी वीडियो के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने उनके शो वाले स्टूडियो पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं, जिस होटल में वह स्टूडियो था, वहां भी तोड़फोड़ की गई।
कुणाल कामरा के साथ हुई घटना में अब कई एंगल तलाशे जाने लगे हैं। एक जानकारी यह भी मिली है कि 3 अप्रैल को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को शिवसेना की ओर से एक शिकायत मिली। इस शिकायत में कुणाल कामरा की आय के स्रोतों की जांच करने की मांग की गई थी। शिकायत में यह दावा किया गया कि कामरा को अलग-अलग देशों से फंडिंग मिल रही है, जो संभवतः उनके वीडियो कंटेंट से जुड़ी हो सकती है।
माना
जा
रहा
है
कि
इन
तमाम
आरोपों
का
उद्देश्य
कुणाल
कामरा
की
विश्वसनीयता
पर
सवाल
उठाना
है।
कुणाल
कामरा
एक
प्रतिबद्ध
कॉमेडियन
हैं।
अपने
शार्प
ह्यूमर
की
वजह
से
उनका
नाम
पिछले
कुछ
सालों
में
बार-बार विवादों से जुड़ा है। उनकी कॉमेडी अक्सर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणी करती है, जो कुछ लोगों को हंसी का कारण बनती है, तो कुछ के लिए नाराजगी का। लेकिन इस बार जो हो रहा है, वह सिर्फ आलोचना या असहमति से आगे बढ़ चुका है। यह मामला अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक सहिष्णुता के बीच टकराव का एक नया अध्याय बनता जा रहा है।
इस सारे मामले को आप इस घटनाक्रम से समझ सकते हैं कि जिन लोगों ने कुणाल कामरा का वो शो देखा था। पुलिस उनके खिलाफ भी एफआईआर कर रही है। उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने के नाम पर परेशान कर रही है। यह मामला तब और अधिक बिगड़ा था जब एक दर्शक को मुंबई पुलिस ने उनके हॉलीडे से वापस बुलवा लिया था।
- उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत हासिल कर ली है, जो उन्हें 7 अप्रैल तक गिरफ्तारी से राहत देती है। इसके साथ ही, उन्हें 500 से ज्यादा मौत की धमकियाँ मिल चुकी है। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए धमकी दी है। मुंबई पुलिस चाहे तो धमकी देने वालों पर कार्रवाई कर सकती है। लेकिन उसकी दिलचस्पी सिर्फ कुणाल कामरा पर कार्रवाई करने में है।
कामरा
के
समर्थकों
का
मानना
है
कि
एक
कॉमेडियन
के
तौर
पर
उनका
काम
समाज
के
सामने
सच
का
आईना
रखना
है।
वे
इसे
अभिव्यक्ति
की
आजादी
का
हिस्सा
मानते
हैं।
दूसरी
ओर,
उनके
आलोचक
कहते
हैं
कि
उनकी
टिप्पणियां
न
सिर्फ
अपमानजनक
हैं,
बल्कि
समाज
में
तनाव
पैदा
करने
वाली
भी
हैं।
इस
बहस
के
बीच
बुक
माय
शो
और
मुंबई
पुलिस
जैसी
संस्थाएं
भी
दबाव
में
आ
गई
हैं।
यहाँ
यही
समझा
जा
सकता
है
कि
टिकटिंग
प्लेटफॉर्म
को
अपने
कारोबारी
हितों
और
नैतिक
जिम्मेदारी
के
बीच
संतुलन
बनाना
पड़
रहा
है,
वहीं
पुलिस
को
कानून
व्यवस्था
और
अभिव्यक्ति
की
स्वतंत्रता
के
बीच
रास्ता
तलाशना
पड़
रहा
है।
यह
पूरा
प्रकरण
अब
सिर्फ
कुणाल
कामरा
तक
सीमित
नहीं
है।
यह
एक
बड़े
सवाल
को
जन्म
दे
रहा
है—क्या भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हास्य और व्यंग्य की कोई सीमा होनी चाहिए? और अगर हां, तो वह सीमा कौन तय करेगा? इस विवाद का नतीजा जो भी हो, यह निश्चित है कि यह आने वाले दिनों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक नई बहस को जन्म देगा।
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