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किसान आंदोलन: कांग्रेस-आप टकराव से इंडिया गठबंधन में दरार?

पंजाब में 19 मार्च को शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों के धरने पर पुलिस की सख़्त कार्रवाई ने न सिर्फ़ किसानों को हिला दिया, बल्कि इंडिया गठबंधन की एकता को भी गहरी चोट पहुंचाई है। पंजाब पुलिस ने धरना ख़त्म करवाने के लिए बल प्रयोग किया और जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंधेर जैसे प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह सब उस वक़्त हुआ, जब ये नेता चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाक़ात के बाद लौट रहे थे। इस घटना ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को आमने-सामने ला खड़ा किया है, जिससे गठबंधन में पहले से मौजूद दरारें और चौड़ी हो गई हैं। कांग्रेस ने आप की पंजाब सरकार और बीजेपी की केंद्र सरकार को एक साथ निशाने पर लिया है। सवाल यह है कि क्या यह इंडिया गठबंधन के लिए ख़तरे की घंटी है, या सियासी नाटक का नया अध्याय?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आप और बीजेपी को किसान विरोधी करार दे दिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता के नशे में चूर दोनों पार्टियाँ देश के अन्नदाताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक कदम उठा रही हैं। खड़गे ने एक्स पर लिखा, 'देश मंदसौर में बीजेपी शासन के दौरान किसानों पर गोलीबारी, लखीमपुर खीरी में मोदी सरकार के मंत्री के बेटे द्वारा किसानों को कुचलना और 2015 में केजरीवाल की रैली में एक राजस्थानी किसान की आत्महत्या को नहीं भूला।'

खड़गे ने आगे आरोप लगाया कि 'मोदी जी का एमएसपी का वादा हो या दिल्ली में आप द्वारा तीन काले क़ानूनों को लागू करना, दोनों ने किसानों को धोखा दिया है।' पंजाब के कांग्रेस सांसदों ने भी संसद परिसर में प्रदर्शन कर आप के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया।

वैसे, आप और कांग्रेस के बीच यह तनाव काफ़ी पहले से ही रहा है। लेकिन रह-रह कर यह कभी बढ़ जाता है तो कभी चुनावी मजबूरी में कम भी हो जाता है। 2024 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में सीट-बँटवारे पर सहमति के बावजूद, दोनों दलों के रिश्ते समय के साथ बिगड़ते गए। अक्टूबर 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन नहीं हो पाया था, जिसके बाद आप अकेले मैदान में उतरी थी। बीजेपी ने हैरान करने वाली जीत हासिल की, और कुछ सीटों पर आप ने कांग्रेस के वोट काटे। 

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फ़रवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में आप ने कांग्रेस के साथ गठबंधन से साफ़ मना कर दिया था। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा था, 'हम गठबंधन चाहते थे, लेकिन केजरीवाल ने ठुकरा दिया।'
दिल्ली चुनाव में दोनों ने एक-दूसरे पर जमकर हमले बोले। राहुल गांधी ने आप पर भ्रष्टाचार और 'शीश महल' के आरोप लगाए तो आप ने राहुल को 'बेईमान' नेताओं के पोस्टर में शामिल किया। नतीज़ा? बीजेपी 27 साल बाद दिल्ली में सत्ता में आई, कांग्रेस और आप दोनों निपट गईं।
पंजाब में कांग्रेस और आप के बीच सहमति कभी नहीं बनी। लोकसभा चुनावों में राज्य कांग्रेस इकाई ने आप के साथ गठबंधन का विरोध किया था। बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल की कमजोर स्थिति को देखते हुए कांग्रेस को लगता है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में वह आप से सत्ता छीन सकती है। पंजाब में किसान एक अहम वोट बैंक हैं और कांग्रेस इस मौक़े को भुनाने की कोशिश में है। पंजाब के विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने हाल ही में दावा किया था कि आप के 32 विधायक उनके संपर्क में हैं, हालांकि आप ने इसे खारिज कर दिया। कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल ने हाल ही में कहा है कि आप सरकार डूबता जहाज है।
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आप ने दिल्ली की हार के बाद गोवा 2027 चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया। अतिशी ने कहा, 'कांग्रेस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।' लेकिन दोनों दलों में कुछ नेता गठबंधन के पक्ष में हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक कांग्रेस नेता ने कहा, 'बीजेपी को हराना आसान नहीं। हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में हम हारे। दोनों दलों की लीडरशिप ने राज्य चुनावों में गठबंधन न करने का फ़ैसला किया है।' एक पंजाब आप नेता ने चेताया, 'लोकसभा में बीजेपी 240 सीटों पर रुकी क्योंकि विपक्ष एकजुट था। अगर इंडिया के दल अलग-अलग चले, तो हम वो लय खो देंगे।'

पंजाब में किसानों पर पुलिस की लाठियां सिर्फ धरने को नहीं तोड़ रही हैं, बल्कि इंडिया गठबंधन की नींव को भी हिला रही हैं। कांग्रेस इसे सियासी हथियार बना रही है, तो आप अपनी साख बचाने में उलझी है। पंजाब में किसानों पर कार्रवाई ने कांग्रेस को आप पर हमला करने का मौक़ा दिया है, लेकिन यह इंडिया गठबंधन की एकता के लिए ख़तरा भी है। कांग्रेस जहां किसानों के समर्थन से 2027 में सत्ता की उम्मीद देख रही है, वहीं आप अपनी सरकार बचाने और बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ाई में फंस गई है। दोनों की आपसी लड़ाई बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, जैसा कि दिल्ली और हरियाणा में देखा गया। 

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क्या यह गठबंधन सिर्फ लोकसभा तक सीमित रहेगा? या राज्य स्तर पर एकजुटता की कमी बीजेपी को और मजबूत करेगी? पंजाब का यह ताज़ा विवाद दिखाता है कि इंडिया गठबंधन की राह आसान नहीं। अगर दोनों दल अपने मतभेदों को नहीं सुलझाते तो 2027 में पंजाब और उससे आगे बीजेपी के लिए रास्ता और साफ़ हो सकता है।

(इस रिपोर्ट का संपादन अमित कुमार सिंह ने किया है)
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