इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि नाबालिग को छूना और उसके पाजामे के नाड़े को फाड़ना "रेप का प्रयास" नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को "असंवेदनशील" बताते हुए उस पर रोक लगा दी। लेकिन यह फैसला सवाल खड़े करता है कि कोई जज किस तरह ऐसी असंवेदनशील टिप्पणी कर सकता है। जानिए पूरा विवरणः
Satya Hindi News Bulletin। सत्य हिंदी समाचार बुलेटिन । सुप्रीम कोर्ट : राष्ट्रीय आपदा के वक़्त हम मूकदर्शक नहीं रह सकते । Supreme Court Says We don’t intend to supplant HC cases, but can’t be mute spectator in national crisis