1947 में हुए भारत के विभाजन के बाद बने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में पहली बार ऐसा हुआ है जब वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी है। आईएसआई के चीफ नदीम अंजुम जब गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सामने आए तो पाकिस्तान के साथ ही दीगर मुल्कों के लोग भी हैरान रह गए।
बताना होगा कि इन दिनों पाकिस्तान में हालात बेहद उथल पुथल वाले हैं। पूर्व वज़ीर-ए-आज़म इमरान खान ने मुल्क की शहबाज़ शरीफ सरकार के साथ ही आर्मी के खिलाफ भी मोर्चा खोला हुआ है। इमरान खान उनकी हुकूमत के गिरने के बाद से ही आर्मी को निशाने पर लेते रहे हैं।
कुछ दिन पहले पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की केन्या में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आर्मी चीफ क़मर जावेद बाजवा की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं।
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आईएसआई चीफ ने कहा कि अरशद शरीफ की जिंदगी को पाकिस्तान में कोई खतरा नहीं था और केन्या में रहते हुए भी वह आईएसआई के संपर्क में थे। नदीम अंजुम ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि दिन की रोशनी में कोई गद्दार, मीर जाफर और मीर सादिक कहे और रात को मुलाकात करे। नदीम अंजुम ने पूछा कि पहले इमरान खान क्यों आर्मी की तारीफ किया करते थे। उन्होंने कहा कि आर्मी को गद्दार इसलिए कहा गया क्योंकि आर्मी ने मुल्क के संविधान के खिलाफ काम करने से इंकार कर दिया था। उन्होंने पूछा कि अगर आर्मी चीफ़ गद्दार हैं तो इमरान खान उनसे छुपकर क्यों मिलते हैं।
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अप्रैल में जब इमरान खान की हुकूमत गिर गई थी तो यह माना जा रहा था कि अब इमरान के लिए आगे की सियासत कर पाना बेहद मुश्किल होगा। लेकिन हाल ही में पाकिस्तान में हुए उपचुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ यानी पीटीआई को जोरदार सफलता मिली थी। उनकी रैलियों में भी जमकर भीड़ उमड़ रही है।
आईएसआई चीफ की नियुक्ति पर टकराव
पिछले साल जब इमरान खान मुल्क के वज़ीर-ए-आज़म थे तो उस वक्त आईएसआई चीफ की नियुक्ति को लेकर उनका आर्मी के साथ जमकर टकराव हुआ था। इमरान खान लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को आईएसआई चीफ बनाना चाहते थे लेकिन क़मर जावेद बाजवा नदीम अंजुम के पक्ष में थे और इसी को लेकर क़मर जावेद बाजवा और इमरान खान के रिश्ते बिगड़ गए थे और हालात ऐसे हो गए थे कि इमरान की हुकूमत को जाना पड़ा था। कहा गया था कि आर्मी चीफ ने उनसे कुर्सी छोड़ने के लिए कहा था।
हुकूमत के गिरने और अरशद शरीफ की हत्या को लेकर जिस तरह पीटीआई ने आर्मी चीफ के खिलाफ मोर्चा खोला, उससे क्या पाकिस्तान की ताक़तवर खुफिया एजेंसी आईएसआई और आर्मी इतने दबाव में आ गई कि आईएसआई के प्रमुख को पत्रकारों के सामने आकर अपनी बात कहनी पड़ी।
ताक़तवर है आर्मी
पाकिस्तान का इतिहास देखें तो वहां आर्मी हमेशा से ताक़तवर रही है और कोई भी राजनेता आर्मी पर हमला नहीं करता। लेकिन यह बीते वक़्त की बात हो चुकी है और मुल्क़ के पूर्व वज़ीर-ए-आज़म इमरान खान बीते कई महीनों से लगातार आर्मी को निशाने पर ले रहे हैं। हालांकि इमरान के वज़ीर-ए-आज़म रहते हुए नवाज शरीफ भी अकसर फौज को निशाने पर लेते थे। लेकिन इमरान इस मामले में बहुत आगे बढ़ चुके हैं।
देखना होगा कि इमरान की आर्मी के साथ यह तकरार कहां तक पहुंचती है और क्या इससे पड़ोसी मुल्क में हालात और ज्यादा बिगड़ेंगे?
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