उत्तराखंड में इन दिनों सचिवालय रक्षक भर्ती परीक्षा यानी एसएससी का पेपर लीक होने की वजह से हंगामा मचा हुआ है। इस मामले में पकड़े गए मुख्य अभियुक्त के संबंध राज्य बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं के साथ रहे हैं। पेपर लीक घोटाले के मामले में अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार किए गए कुछ लोग पहले बस कंडक्टर, ऑटो रिक्शा ड्राइवर और फैक्ट्री में कर्मचारी के तौर पर काम कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस घोटाले में 200 करोड़ रुपए तक का लेनदेन हुआ है। इसे लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।
कुछ दिन पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को उठाया तो उसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। इसकी जानकारी बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही उत्तराखंड की विधानसभा में हुई भर्तियों को लेकर भी उत्तराखंड का सियासी माहौल गर्म है।
व्यापमं घोटाले से तुलना
उत्तराखंड एसएससी भर्ती घोटाले की तुलना मध्य प्रदेश में 2013 में हुए व्यापमं घोटाले से की जा रही है। व्यापमं घोटाले को भारत का सबसे बड़ा प्रवेश एवं भर्ती घोटाला माना जाता है।
एसएससी भर्ती घोटाले में जो जानकारी सामने आई है, उससे पता चला है कि 200 से ज्यादा उम्मीदवारों से 10 से 15 लाख रुपए लेकर उन्हें लीक किए गए पेपर दिए गए थे।
इस पेपर की कॉपी को लखनऊ की एक प्राइवेट फर्म के मालिक और उसके स्टाफ के सदस्य ने लीक किया था। उत्तराखंड सरकार ने इस प्राइवेट फर्म से अपना अनुबंध तोड़ लिया है।
इस घोटाले का मास्टरमाइंड हाकम सिंह रावत नाम का शख्स है। रावत की उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित तमाम बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें हैं। रावत के बारे में कहा जाता है कि उसने बहुत कम समय में अच्छी-खासी संपत्ति इकट्ठा कर ली है। हाकम सिंह रावत के अलावा इस मामले में केंद्रपाल, चंदन मनराल, मनोज जोशी, जगदीश गोस्वामी सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस घोटाले में शामिल कई लोगों ने नापाक ढंग से कमाए गए रुपयों के बदौलत 50-50 करोड़ तक की संपत्ति बना ली है और वे इस धंधे में पिछले दस साल से लगे हुए हैं।
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जिला पंचायत सदस्य रहा है हाकम
हाकम सिंह रावत उत्तरकाशी जिले में जिला पंचायत का सदस्य रह चुका है। हाकम सिंह रावत ने उत्तर प्रदेश के धामपुर में एक घर किराए पर लिया था जहां पर उसने एसएससी परीक्षा के अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 1 दिन पहले बुलाया था और हर एक से 15-15 लाख रुपए लेकर उन्हें लीक हुए पेपर देकर उनकी मदद की थी।
द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, एसटीएफ के द्वारा गिरफ्तार किया गया केंद्रपाल नाम का शख्स पेपर लीक के काम और धोखाधड़ी माफिया के साथ लंबे वक्त से जुड़ा है। केंद्रपाल ही हाकम सिंह रावत को इस काम में लाया था। दोनों की मुलाकात 2011 में हुई थी। केंद्रपाल 1996 में ऑटो रिक्शा चलाता था। उसके बाद उसने धामपुर में एक कपड़ों की दुकान खोली। लेकिन 2011 में वह पेपर लीक करने वालों के संपर्क में आ गया।
पुलिस को धामपुर में उसके 3.3 एकड़ में बने एक शानदार मकान के साथ ही हाकम सिंह रावत के उत्तरकाशी के रिजॉर्ट में पार्टनरशिप होने के बारे में पता चला है।
कई गुना बढ़ी संपत्ति
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, घोटाले में पकड़े गए एक और शख्स चंदन मनराल की केंद्रपाल से मुलाकात साल 2012 में हुई थी। चंदन मनराल रामनगर का रहने वाला है और उसके पास कम से कम 100 करोड़ रुपए की संपत्ति है। मनराल पहले बस कंडक्टर था और 30 साल तक वह बस कंडक्टर का ही काम करता रहा। इसके बाद उसने अपनी बस खरीदी और एक ट्रांसपोर्ट एजेंसी भी शुरू की। केंद्रपाल से मुलाकात होने के बाद उसकी संपत्ति कई गुना बढ़ गई।
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ईडी को दी जानकारी
इस मामले में जोरदार हंगामा होने के बाद उत्तराखंड की धामी सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ का गठन किया था। एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि अभियुक्तों की संपत्तियों को लेकर जांच एजेंसी ईडी को जानकारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि ईडी ने इस मामले में जानकारी मांगी है और हम उन्हें जानकारी उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले के सभी अभियुक्तों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई होगी और उनकी संपत्तियों को जब्त किया जाएगा।
विधानसभा में हुई भर्तियों में गड़बड़ी!
उत्तराखंड में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पेपर लीक घोटाले के अलावा विधानसभा में हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और इसमें कैबिनेट मंत्रियों के पीआरओ को नौकरी दी गई है। उत्तराखंड की विधानसभा में बीते वर्ष 129 भर्तियां हुई थीं।
जानकारी के मुताबिक़, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ओएसडी विनोद धामी की पत्नी एकांकी धामी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के पीआरओ राजन रावत, कैबिनेट मंत्री रेखा के पीआरओ गौरव गर्ग को विधानसभा में नियुक्ति दी गई है। इसके अलावा कई वीवीआईपी लोगों के रिश्तेदारों को भी नियुक्तियां दी गई हैं।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया है कि विधानसभा में हुई 129 भर्तियों में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। मंत्रियों और बीजेपी नेताओं के चहेतों को रेवड़ी की तरह नौकरियां बांटी गईं। राज्य सरकार इस मामले की भी जांच करा रही है।
लोग बोले- सीबीआई जांच हो
इन घोटालों को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों की मांग है कि घोटालों में जब प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से किसी नेता/मंत्री का नाम आ रहा है तो स्पष्ट रूप से इनकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। लोगों का कहना है कि जांच के नाम पर सिर्फ छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है जबकि घोटाले में कई बड़े अफसर और राजनेता शामिल हैं, जिन्हें बचाया जा रहा है। वन, शिक्षा, सहकारिता सहित कई अन्य विभागों में भी भर्तियों में गड़बड़ी हुई है। युवा रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं और प्रदेश में एक के बाद एक भर्तियों में घोटाले सामने आ रहे हैं।
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