जोशीमठ में घरों में ही नहीं बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग 58 में भी चौड़ी दरारें आ चुकी हैं और यह धंस गया है। जोशीमठ के प्रकरण से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने सभी जिलों से जोशीमठ जैसे संवेदनशील स्थलों के संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
पुनर्वास की मांग को लेकर इलाके के लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं। ठंड के इस मौसम में उनके लिए चुनौतियां और ज्यादा बढ़ गई हैं। अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए लोगों ने कैंडल मार्च भी निकाला है। जोशीमठ के लोग जमीन के धंसने के पीछे क्या वजह बताते हैं?
हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे और उत्तराखंड सरकार से कहा है कि यह एक मानवीय समस्या है इसलिए इस मामले में व्यावहारिक समाधान निकालें। अदालत में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने कहा है कि अगर समय रहते यहां से प्रभावित लोगों को विस्थापित नहीं किया गया तो बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि होगी। संघर्ष समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि लोगों को जल्द विस्थापित किया जाए।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके की गफूर बस्ती में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों की जानी है और इस बारे में स्थानीय लोगों व पुलिस-प्रशासन का क्या कहना है?
अंकिता के पिता और उसकी मां ऋषिकेश में इस मुद्दे पर सामाजिक संगठन युवा न्याय संघर्ष समिति की ओर से दिए जा रहे धरने में शामिल हुए। अंकिता को इंसाफ दिलाए जाने की मांग को लेकर समिति की ओर से 1 महीने से ज्यादा वक्त से धरना दिया जा रहा है।
उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण से जुड़े पिछले कानून में 5 साल की सजा का प्रावधान था। बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश के साथ ही कर्नाटक, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी ऐसे विधेयक पारित होकर कानून की शक्ल ले चुके हैं।