दक्षिण भारत में ब्राह्मणवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष का बिगुल फूंकने वाले सुधारवादी -अनीश्वरवादी-दलित पिछड़ों के बडे नेता पेरियार ने क्या राम-सीता को अपमानित किया था?
तमिल फ़िल्मों की दो दिग्गज हस्तियों के राजनीति में एकजुट होने की ख़बरों ने तमिलनाडु में सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेताओं और रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।
अमित शाह के ‘हिंदी हमारे देश को एकजुट करती है’ के बयान ने ही लोगों को ‘अलग’ करना शुरू कर दिया है। रजनीकांत ने कहा कि हिंदी को न सिर्फ़ तमिलनाडु बल्कि दक्षिण भारत के किसी भी राज्य में नहीं थोपा जाना चाहिए।
पीने के पानी निकट भविष्य का सबसे बड़ा संकट बनने जा रहा है। हाल यह है कि दूध और तेल की तरह पानी भी ट्रेन से भेजा जाएगा। एक करोड़ लीटर पानी लेकर एक ट्रेन जोलारपेट से चेन्नई भेजी गई है।
तमिलनाडु के मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव में जहाँ डीएमके गठबंधन को शानदार जीत दिलायी, वहीं 22 विधानसभा सीटों के लिए उप-चुनाव में 9 सीटें मुख्यमंत्री पलानीसामी को जीत दिलाकर सरकार बचा ली। तो क्या वोटर मोदी से नाराज़ थे?
तमिलनाडु की एआईएडीएमके सरकार में मंत्री के. टी. राजेंद्र बालाजी ने कहा, ‘जबसे हमने अम्मा (जयललिता) को खोया है, प्रधानमंत्री मोदी हमारे डैडी बनकर आए हैं।'
तमिलनाडु में एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में बीजेपी को सिर्फ़ 5 सीटें मिली हैं। दूसरी ओर डीएमके भी कांग्रेस को 7 से ज़्यादा सीटें नहीं देना चाहती।
तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। साथ ही यह भी घोषणा कर दी है कि वह लोकसभा में किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में फिर से अपनी सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने दक्षिण के हर राज्य से एक-एक और कुल मिलाकर पाँच बड़ी हस्तियों पर अपनी नज़र गड़ा रखी है।
प्रियंका गाँधी के राजनीति में आ जाने के बाद एक बार फिर राजनीति में वंशवाद, परिवारवाद, भाई-भतीजावाद को लेकर बहस छिड़ गई है। दक्षिण भारत की राजनीति में भी परिवारवाद ही हावी है। हालाँकि केरल में स्थिति अलग है।
पीएम मोदी के तमिलनाडु दौरे पर जाने से पहले ही ट्विटर पर हैशटैग #GoBackModi ट्रेंड करने लगा। इस दौरान लोगों ने ट्विटर पर केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ जमकर गुस्सा निकाला।
करुणानिधि और जयललिता की ग़ैरमौजूदगी में यह पहला बड़ा चुनाव है। तमिलनाडु की राजनीति में यह सवाल अहम है कि इन दो बड़े नेताओं की विरासत को कौन और कैसे आगे बढ़ाएगा?
सपा और बसपा से मिले झटके से कांग्रेस अभी उबर भी नहीं पाई है कि दक्षिण में उसके सहयोगी दलों ने नई परेशानियाँ पेश करनी शरू कर दी हैं। कर्नाटक में जेडीएस ने एक-तिहाई सीटों की माँग की है।