तेजस्वी यादव द्वारा जाति जनगणना के मुद्दे पर विभिन्न दलों के 33 नेताओं को चिट्ठी लिखे जाने के क्या मायने हैं? आख़िर उनसे इस मुद्दे पर आगे की रणनीति के लिए सुझाव क्यों मांगे गए हैं? क्या इसी बहाने विपक्षी एकजुटता की कोशिश है?
क्या नीतीश कुमार अपनी राजनीति के लिए तेजस्वी का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं? कहीं नीतीश के नज़दीक जाकर तेजस्वी विपक्षी नेता के तौर पर अपनी धार तो नहीं खो रहे हैं? तो डॉ. मुकेश कुमार के साथ चर्चा में शामिल हैं- कन्हैया भेल्लारी, अनिल सिन्हा, प्रेम कुमार, रविरंजन और समी अहमद
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जाति जनगणना पर 10 दलों के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री मोदी से मिलेगा। इसमें बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी शामिल होंगे।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात के लिए नीतीश कुमार को समय नहीं मिलने को लेकर कहा है कि प्रधानमंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री का अपमान किया है। नीतीश कुमार जाति जनगणना पर प्रधानमंत्री से मिलना चाहते हैं।
तेजस्वी बोले - मोदी कर रहे नीतीश कुमार का अपमान। ट्विटर पर बरसे राहुल गांधी, बताया पक्षपाती, इंस्टाग्राम पर भी संकट। मुसलमान रिक्शेवाले पर हमले के आरोप में गिरफ़्तार लोगों को जमानत। दिनभर की बड़ी ख़बरों का विश्लेषण-
Satya Hindi News bulletin। सत्य हिंदी समाचार बुलेटिन। तजस्वी: नीतीश को मिलने का समय न देकर पीएम उनका अपमान कर रहे। राहुल : ट्विटर पक्षपात करने वाला प्लेटफॉर्म, न्यूट्रल नहीं है।
Satya Hindi News Bulletin। सत्य हिंदी समाचार बुलेटिन। तेजस्वी : विपक्ष एक साथ आए, नहीं तो इतिहास माफ नहीं करेगा। पेट्रोल-डीज़ल आज फिर मंहगा, मई से 10.51 रु. की हुई बढ़ोतरी। Tejashwi Yadav: Opposition must come together, otherwise history won’t forgive them
तेजस्वी थामेंगे चिराग का हाथ?मोदी ने कहा, पहले परिसीमन फिर चुनाव और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा। शिवसेना ने कहा, बीजेपी से मुक़ाबले के लिए पवार से हाथ मिलाएँ राहुल। देखिए दिन की बड़ी ख़बरों का विश्लेषण-
विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी आरजेडी के विधायकों को बिहार पुलिस ने विधानसभा के अंदर पीटा। वे बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक का विरोध कर रहे थे।
अब ये साफ़ दिख रहा है कि बिहार में सत्ता विरोधी लहर चल रही है। तेजस्वी, चिराग और कन्हैया की सभाओं में जुट रही भीड़ इसका प्रमाण है। मगर क्या ये लहर सुनामी बनेगी और एनडीए सरकार को डुबा सकेगी? पेश है इसी मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, विजय त्रिवेदी और निवेदिता शक़ील से मुकेश कुमार की बातचीत।