कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच चुनाव आयोग ने सावधानियों का परिचय देते हुए चुनाव कराने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन दलों की रिश्वत पर लगाम लगाने के लिए क्या कुछ किया गया?
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच चुनाव आयोग ने पाँच राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। जानिए, अपने फ़ैसले के बचाव में आयोग ने क्या कहा।
आयोग ने बीते 3 दिन में कई राजनीतिक दलों के नेताओं, तमाम जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अफसरों और निर्वाचन के काम से जुड़े अफसरों के साथ बैठक की और इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।
उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग की वेबसाइट को कथित तौर पर हैक किए जाने की ख़बरों पर सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा है कि ऐसे घपलों के लिए पूरे राज्य में जाँच होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई है कि कहीं इसे सरकार से संरक्षण प्राप्त तो नहीं है।
पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव के बीच कोरोना संक्रमण के हालात कितने भयावह शक्ल ले चुके हैं, इसे कोलकाता हाई कोर्ट की बेहद तल्ख टिप्पणियों से समझा जा सकता है।
चुनाव आयोग ने पिछले महीने के तीसरे सप्ताह में केरल की तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव की तारीख़ का ऐलान किया तो क़ानून मंत्रालय ने उसे चुनाव टालने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग ने इसे टाल भी दिया। फिर इसे अपना फ़ैसला बदलना पड़ा।
एक दौर था जब मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन ने चुनाव नहीं होने दिया था। एक आज का दौर है कि चुनाव आयोग को उसकी शक्तियों की याद सुप्रीम कोर्ट को दिलानी पड़ रही है।
क्या चुनाव आयोग की आचार संहिता कारगर नहीं है? यदि ऐसा है तो 66 पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम पत्र क्यों लिखा है? चुनाव आयोग के कामकाज के तरीक़े पर आपत्ति क्यों है?