Satya Hindi News Bulletin। सत्य हिंदी समाचार बुलेटिन।अमेठी: दलित प्रधान के पति को जिंदा जलाया, मौत ।भोपाल में हुआ फ्रांस के ख़िलाफ़ भारी विरोध प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बात का दावा करते नहीं थकते कि प्रदेश में हर व्यक्ति सुरक्षित है। लेकिन दलितों पर हो रहे अत्याचार की तमाम घटनाएं उन्हें पूरी तरह झूठा साबित करती हैं।
हाथरस घटना के बाद ग़ाज़ियाबाद के करेरा में कथित तौर पर 236 दलितों के बौद्ध धर्म अपनाने की बात अभी प्रशासन मानने को तैयार भी नहीं है कि और भी दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी है।
हर रोज़ भेदभाव और अपमान झेलते रहे दलितों को हाथरस मामले ने किस हद तक झकझोर दिया है? यह इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस घटना के बाद कम से कम 236 दलितों ने बौद्ध धर्म अपना लिया है। एनसीआर में ही।
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उत्तर प्रदेश के गोंडा में तीन दलित बहनों पर एसिड हमला कर दिया। सवाल है कि आख़िर तमाम प्रयासों के बावजूद एसिड के हमले क्यों नहीं रुक रहे हैं? उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध क्यों कम नहीं हो रहे हैं?
इतिहास में हमेशा ऐसे लोग हुए हैं जो अन्याय को पहचान सके हैं। जो हिंसा के स्रोत तक पहुँच पाते हैं। ऐसे लोगों को आप चाहे तो न्याय का समुदाय या इंसाफ़ की बिरादरी कह सकते हैं।
हाथरस मामले में राहुल गाँधी ने सीधे योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने दलित, मुसलिम और आदिवासियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और उनकी पुलिस के लिए पीड़िता 'कोई नहीं' थी इसलिए किसी का दुष्कर्म हुआ ही नहीं।
पीड़िता के पक्ष में बने माहौल की काट के लिए अब अभियुक्तों के पक्ष में अभियान शुरू कर दिया गया है, जिसका नतीजा है फर्ज़ी वीडियो और फेक न्यूज़ की बाढ़। लेकिन इसके पीछे किसका हाथ है? वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट-
हाथरस मामले में 10 हज़ार नारीवादियों ने बयान जारी किया है। उन्होंने हाथरस गैंगरेप और हत्या की निंदा की है और इसके दोषियों, ज़िम्मेदार अफ़सरों पर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं, दलितों, ग़रीबों पर अपराध बढ़ गया है।
हाथरस की घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। क्यों होती हैं इस तरह की घटनायें? क्यों दलित समाज है सवर्ण जातियों के निशाने पर? क्या है बर्बरता के असली कारण? दलित और सवर्ण समाज के बीच क्या बदल रहा है?
उत्तर प्रदेश सरकार फ़ोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की जिस रिपोर्ट के आधार पर हाथरस में बलात्कार की घटना को सिरे से खारिज कर रही थी, उस रिपोर्ट को ही खारिज कर दिया गया है।