भारत जोड़ो यात्रा रविवार को श्रीनगर में अपने गंतव्य पर पहुँच गई। जानिए पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने क्या क्या कहा और सोमवार को यात्रा के तहत क्या कार्यक्रम होंगे।
भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा को अध्यक्ष
पद के लिए एक साल का सेवा विस्तार दिया गया। दिल्ला में चल रही पार्टी की राष्ट्रीय
कार्यकारिणी की बैठक में इस बात की घोषणा की गई।
यूपी में 14 लोकसभा सीटों को लेकर बीजेपी इतना बेचैन क्यों है। अचानक उसकी तैयारियों में इतनी तेजी क्यों है, जबकि 2024 का आम चुनाव तो अभी दूर है और यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार मजबूती से जमी हुई है। क्या कुछ चल रहा है यूपी में, जानिएः
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने राम मंदिर खोलने की अभी सिर्फ तारीख घोषित की है। लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर फौरन हमलावर हो गया। बीजेपी खुश है। अब इसी पर बहस का रुख भी मुड़ रहा है। इस घटनाक्रम का विश्लेषण यही बताता है कि विपक्ष बीजेपी को इस मुद्दे पर खेलने का मौका खुद दे रहा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बीच अब ख़बर है कि अमित शाह भी इसी महीने कई राज्यों की यात्रा करने वाले हैं। जानिए, उनकी यह यात्रा क्यों है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज 5 जनवरी को त्रिपुरा में कहा कि 1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर जनता के लिए खुल जाएगा। शाह गुरुवार को वहां रथ यात्रा निकालने गए थे। त्रिपुरा में दो महीने बाद चुनाव होने वाले हैं।
लड़की को कार से कई किलोमीटर तक घसीटने के कंझावला मामले ने अब काफ़ी ज़्यादा तूल पकड़ लिया है। जानिए, आख़िर क्यों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जाँच के आदेश देने पड़े।
बीजेपी शासित कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के बाद भी दोनों राज्यों के बीच विवाद क्यों है? क्या केंद्रीय गृहमंत्री उस विवाद को सुलझा पाए? जानिए अमित शाह ने क्या कहा।
क्या गृहमंत्री अमित शाह को भी अब यह लगने लगा है कि कट्टरपंथ हर संप्रदाय में दिखने लगा है और यह किसी धर्म विशेष तक सीमित नहीं है? आख़िर उन्होंने क्यों कहा कि कट्टरपंथ एक संप्रदाय तक सीमित नहीं है?
गुजरात चुनावों में 2002 दंगों की वापसी हो गई । अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने कहा हमने दंगाइयों को सबक़ सिखा दिया । अब गुजरात में नहीं होती हिंसा और नहीं लगते कर्फ्यू ? क्यों आई बीजेपी को दंगों की याद?
विकास की बात करने वाले मोदी शाह गुजरात चुनाव में अंततः अपने पुराने हथकंडे पर लौट आए है . गृह मंत्री को अब दंगा याद आ गया है और इसका इस्तेमाल चुनावी गोलबंदी के लिए किया जा रहा है .आज की जनादेश चर्चा .
2002 के वीभत्स गुजरात दंगों की याद देश के गृहमंत्री अमित शाह ने फिर से दिला दी है। इसे गुजरात के मौजूदा विधानसभा चुनाव के दौरान याद दिलाया गया है। दो दशक बीच चुके हैं। एक पूरी नई पीढ़ी सामने आ चुकी है, क्या वो इन दंगों का सच जानती है, उस दंगे को जानने की जरूरत हैः
गृहमंत्री अमित शाह को गुजरात दंगे क्यों याद आ रहे हैं? वे क्यों कह रहे हैं कि 2002 में उन्होंने सबक सिखा दिया? उन्होंने किसको सबक सिखाया और कैसे सिखाया? क्या वे और उनकी पार्टी फिर से हिंदू-मुसलमान पर उतर आई है? क्या चुनाव प्रचार के आख़िरी चरण में अब इस तरह की और भी बयानबाज़ी बीजेपी नेता करेंगे?
समान नागरिक संहिता लाने के अमित शाह के बार-बार के वादे से लगता है कि बीजेपी में किसी तरह की हताशा झलक रही है। क्या इसका मतलब यह है कि राम मंदिर पहले ही अपनी मतदान क्षमता को पार कर चुका है?
गुजरात चुनाव में अब क्या '2002 के दंगे' पर बयानबाजी़ शुरू होगी? आख़िर गृहमंत्री अमित शाह ने '2002 में सबक़ सिखाने' का ज़िक्र क्यों किया? जानिए इसके क्या मायने हैं।