आजमगढ़ और रामपुर के समाजवादी गढ़ों को अब भाजपा ने तोड़ दिया है, जिसके अब यूपी में 64 लोकसभा सांसद हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी का क्या। क्या अखिलेश का चैप्टर खत्म हो गया है? नीलू व्यास के साथ बेबाक में वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह, शीतल पी सिंह, शरत प्रधान, डॉ. सुनीलम और भाजपा प्रवक्ता देवराज आहूजा शामिल हैं
ऐसा लगता है कि आजम खान और अखिलेश यादव ने आखिरकार अपने मतभेदों को भुला दिया और फिर से एक हो गए। आइए जानें कि क्या रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने दोनों को एक बार फिर साथ ला दिया है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तमाम तल्खियों को मिटाते हुए बुधवार को दिल्ली के अस्पताल में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ सपा नेता आजम खान से मुलाकात की। इस मुलाकात के राजनीतिक मकसदों को आसानी से समझा जा सकता है।
सिब्बल के बाद जयंत चौधरी को राज्यसभा का उम्मीदवार बना कर अखिलेश यादव ने कुछ तो संकेत दिया है .जनादेश चर्चा में अंबरीश कुमार के साथ वरिष्ठ पत्रकार हरजिंदर, हरिशंकर जोशी, अनिल सिन्हा, राजनीतिक विश्लेषक अरुण त्रिपाठी और राजनीतिक विद्वान डॉ. रवि यादव शामिल हैं।
समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और मशहूर वकील कपिल सिब्बल को राज्यसभा का नामांकन भरवा दिया है। सिब्बल ने आजम खान का मुकदमा लड़ा और उन्हें जेल से बाहर भी करा दिया। मुद्दा क्या यहीं तक सीमित है? आज की जनादेश चर्चा इसी पर .
यूपी में पिछड़ों की राजनीति करने वाले ओमप्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को पहले एसी वाला नेता कहा फिर अपने बयान से यूटर्न ले लिया। राजभर की पार्टी ने पिछला विधानसभा चुनाव सपा गठबंधन के साथ मिलकर लड़ा था और 6 सीटें जीती थीं। लेकिन अब दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं।
सपा के संस्थापकों में से एक हैं। सपा विधायक दल का उन्होंने और उनके बेटे ने एक तरह से बॉयकॉट किया लेकिन सोमवार को विधानसभा में शपथ लेने पहुंच गए। कुल मिलाकर सपा के अंदरुनी हालात अच्छे नहीं हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा था कि बीजेपी मायावती को राष्ट्रपति बनाने जा रही है। उस पर मायावती ने गुरुवार को पलट वार किया। मायवती ने कहा कि मैं सीएम-पीएम तो बनना चाहती हूं लेकिन राष्ट्रपति तो हर्गिज नहीं।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकारी कोटे की 36 सीटों के लिए चुनाव में अखिलेश यादव गड़बड़ी के आरोप क्यों लगा रहे हैं? जानिए, क्या चल रहा है चुनाव में।
यूपी में अब एमएलसी चुनाव होने वाले हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 14 यादवों को मैदान में उतार दिया है, जबकि मात्र दो मुसलमानों को टिकट दिया है। सपा पर पहले भी यादव पार्टी होने का आरोप लगा था लेकिन तब अखिलेश ने इसे नई सपा बताया था।
सीएसडीएस के आंकड़ों ने जाट से लेकर ब्राह्मण मतदाताओं के रुख को साफ कर दिया है .इनका ज्यादातर वोट भाजपा को मिला .न किसान आंदोलन का कोई असर दिखा जाट बिरादरी पर न ही ब्राह्मण नाराज था .आज की जनादेश चर्चा इसी पर .