बीजेपी की आईटी सेल अपने विरोधियों के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा चलाने के लिए बदनाम रही है और अगर विरोध किसी महिला से हो तो वह ओछेपन पर भी उतरती रही है। उसे देश की कई महिला राजनेताओं के मामले में ऐसा करते हुए भारत के लोगों ने देखा है।
ताज़ा मामला आर्किटेक्ट अन्वय नाइक की बेटी और उनकी पत्नी को लेकर बीजेपी आईटी सेल के नये कारनामे का है। ये वही अन्वय नाइक हैं, जिनकी आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी को जेल में डाला हुआ है और बीजेपी ने उनकी रिहाई के लिए हाय-तौबा मचाई हुई है।
बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई की आईटी सेल के संयोजक सतीश निकम ने अन्वय की बेटी अदन्या नाइक के सोशल मीडिया अकाउंट्स से फ़ोटो लेकर उन्हें बेहूद कैप्शन के साथ वायरल किया है। इन फ़ोटो में अदन्या के साथ उनकी मां भी हैं। निकम की विचारधारा से समर्थन रखने वाले कई लोग भी ऐसी ही पोस्ट्स कर रहे हैं।
इन सतीश निकम ने ट्विटर पर मुल्क़ के वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के साथ अपनी फ़ोटो को प्रोफ़ाइल पिक्चर बनाया हुआ है। इससे इनके सियासी रसूख का भी अंदाजा लगता है। अब बात इनकी हरक़तों की करते हैं।
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इसके बाद उन्होंने लिखा कि हमारे लोकतंत्र पर हमला कर रहे इन गिद्धों का पर्दाफ़ाश किए जाने की ज़रूरत है। सतीश निकम ने लिखा कि ये लोग मराठी मानुस जैसे बिलकुल भी नहीं लगते। अर्णब की रिहाई के लिए ट्विटर पर चले ट्रेंडस के साथ उन्होंने इस पोस्ट को लिखा और इसमें महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी टैग कर दिया।
लेकिन जैसे ही उनकी पोस्ट को लेकर बवाल होना शुरू हुआ, उन्होंने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया लेकिन अभी भी एक पोस्ट उनके ट्विटर अकाउंट पर है, जिसमें उन्होंने अदन्या और उनकी मां की फ़ोटो लगाई हुई हैं।
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शिव सेना की आपत्ति
निकम की इस पोस्ट की शिव सेना से संबंद्ध युवा सेना के सचिव वरूण सरदेसाई ने मज़म्मत की है। वरूण ने कहा, ‘देखो जरा, बीजेपी आईटी सेल क्या फैला रही है। मराठी मानुस के साथ खड़े होने के बजाय कोई कैसे इस तरह की बात सोच सकता है।’
सरदेसाई ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख, महाराष्ट्र साइबर सेल और ट्विटर इंडिया से निकम के ख़िलाफ़ एक्शन लेने के लिए कहा है, क्योंकि निकम ने किसी महिला की इजाजत के बिना उनकी व्यक्तिगत फ़ोटोज को पोस्ट किया है।
बीजेपी लोगों को बताए, कि ये लोकतंत्र बचाने के लिए लड़ने का कौन सा तरीका है जिसमें आप किसी भी शख़्स के (चाहे महिला हो या पुरूष) व्यक्तिगत जीवन में घुसने की कोशिश कर रहे हो।
सोशल मीडिया के दौर में महाराष्ट्र जैसे अहम प्रदेश के संयोजक की कुर्सी पर बैठा शख़्स ये सब कर रहा है तो इससे दो बातें समझ में आती हैं। पहली यह कि इस बड़े पद पर उसका मनोनयन बिना बड़े नेताओं की सहमति के नहीं हुआ होगा, दूसरा यह कि जब इस शख़्स की सोच ऐसी है, तो इसने अपने नीचे कैसे लोगों को भर्ती किया होगा, इसके लिए ज़्यादा दिमाग ख़र्च करने की ज़रूरत नहीं है।
बीजेपी को लगता है कि अगर अर्णब के साथ ग़लत हुआ है तो वह सड़कों पर धरना-प्रदर्शन से लेकर अपनी सरकारी ताक़त का इस्तेमाल करे लेकिन किसी के सोशल मीडिया अकाउंट्स से फ़ोटो उठाकर उनके निजी जीवन पर कमेंट करना या उन्हें चरित्र प्रमाण पत्र देने की कोशिश करना बीजेपी के भद्दे चेहरे व उसकी सोच को उजागर करता है।
अर्णब की रिहाई के लिए बीजेपी विधायक राम कदम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के आवास के बाहर अनशन पर बैठे हुए हैं। गृह मंत्री से लेकर रक्षा मंत्री और बीजेपी के ऐसे मुख्यमंत्री जिन्होंने अर्णब को कभी 2 किमी दूर से भी न देखा हो, वे भी उनकी गिरफ़्तारी को लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं।
अंधभक्त बनी बीजेपी
बीजेपी और उसकी विचारधारा से समर्थन रखने वाले पत्रकार भी अर्णब के लिए ताबड़तोड़ ट्वीट कर रहे हैं। उनका कहना है कि अर्णब को बचाने के लिए सीधे प्रधानमंत्री जी को मैदान में कूदना चाहिए लेकिन वे ये देखने के लिए तैयार नहीं हैं कि जिस शख़्स पर दो लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगे हैं और पीड़ित परिवार न्याय के लिए महाराष्ट्र सरकार के पास पहुंचा है, तब ही पुलिस जांच कर रही है। पत्रकारों से इतर बीजेपी ने तो अर्णब के समर्थन में उतरने के बाद सारी हदें पार कर ही दी हैं।
अन्वय कॉनकॉर्ड डिजाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध संचालक थे। अन्वय व उनकी मां कुमुद ने 5 मई, 2018 को मुंबई के अलीबाग के कावीर गांव स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। अन्वय ने सुसाइड नोट लिखा था जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि पत्रकार अर्णब गोस्वामी, फिरोज़ शेख और नितीश सारडा ने उनके पांच करोड़ 40 लाख रुपये नहीं दिए हैं।
इस मामले में 2018 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गयी थी लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ रही थी। प्रदेश में सरकार बदलने पर 5 मई, 2020 को अन्वय की पत्नी अक्षता नाइक ने सोशल मीडिया पर इस प्रकरण को लेकर वीडियो डाला था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या दो साल बाद उन्हें न्याय मिलेगा?
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