पत्रकार राना अय्यूब को मंगलवार को मुंबई एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। वह लंदन जाने के लिए एयरपोर्ट पर पहुंची थीं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी राना अय्यूब के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जांच कर रहा है।
राना पर मनी लॉन्ड्रिंग करने और कोरोना काल में दूसरों की मदद करने के नाम पर इकट्ठे किए गए पैसों में हेराफेरी करने का आरोप है।
मुंबई एयरपोर्ट पर रोके जाने की जानकारी राना अय्यूब ने खुद एक ट्वीट करके दी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें भारतीय लोकतंत्र पर अपनी बात रखने के लिए जाना था। और उन्होंने कई हफ्ते पहले इस बारे में बता दिया था।
पत्रकार ने कहा है कि रोके जाने के बाद ईडी की ओर से उन्हें तुरंत समन भी आ गया। ईडी की ओर से उन्हें 1 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
वाशिंगटन में स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स नाम की संस्था ने राना को महिला पत्रकारों के खिलाफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होने वाली हिंसा पर चर्चा के लिए बुलाया था। राना कई बार ट्रोल्स की ओर से खुद को धमकियां मिलने की बात कह चुकी हैं।
1.77 करोड़ जब्त किए थे
बीते महीने में ईडी ने राना के 1.77 करोड़ रुपए जब्त कर लिए थे। राना के खिलाफ यह कार्रवाई गाजियाबाद पुलिस की ओर से दर्ज की गई एक एफ़आईआर के आधार पर की गई थी। यह एफ़आईआर हिंदू आईटी सेल नाम के एक एनजीओ के संस्थापक विकास सांकृत्यायन के द्वारा बीते साल सितंबर में दर्ज कराई गई थी।
ईडी को पता चला है कि राना अय्यूब ने अपने ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफार्म Ketto के जरिए 2020 और 2021 के बीच 2.69 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे। ईडी ने कहा है कि राणा अय्यूब ने Ketto के जरिए जो रकम इकट्ठा की, इसे उनके पिता और बहन ने बैंक से निकाल लिया था और यह पूरा पैसा इस पत्रकार के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
राना अय्यूब ने ईडी के सामने कुछ दस्तावेज रखे थे जिसमें उन्होंने 31 लाख के खर्च का हिसाब किताब दिया था। लेकिन जांच के बाद ईडी का कहना है कि कुल खर्च सिर्फ 17.66 लाख का ही हुआ है।
ईडी ने कहा है कि राना अय्यूब के द्वारा राहत व मदद के काम के नाम पर फर्जी बिल बनाए गए और निजी हवाई यात्राएं की गईं। एजेंसी ने कहा है कि उसकी जांच में यह पूरी तरह साफ है कि इस पैसे को दान के नाम पर इकट्ठा किया गया और ऐसा योजना बनाकर किया गया।
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