जीडीपी के आँकड़े ‘बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने’ के मामले में अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद और अरविंद सुब्रमण्यन आमने-सामने आ गये हैं। ऐसे में अब सही किसे माना जाए?
अब शोध में दावा किया गया है कि जीडीपी के आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। यह शोध किसी और ने नहीं, बल्कि पिछली नरेंद्र मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन ने किया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट, यानी जिस ब्याज दर पर वह बैंको को पैसे देता है, उसमें कटौती करने का फ़ैसला किया है। इससे बैंकों का ब्याज सस्ता हो सकता है और आपका ईएमआई कम हो सकता है।
नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज संभालते ही अर्थव्यवस्था से जुड़ी बुरी खबरें आने लगी हैं। दरअसल, पिछली सरकार ने जिन आँकड़ों को छिपा रखा था, वे अब सामने आ रहे हैं।
अमेरिका ने भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ़ प्रीफ़रेसेंज से बाहर कर दिया है, जिससे विकासशील देशों को मिलने वाली सुविधाएँ अब भारत को नहीं मिलेंगी। भारत से होने वाले 5.60 अरब डॉलर का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
भारत सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था अब नहीं रही। चीन ने इसे पछाड़ दिया है। लंबे समय तक दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने के बाद चीन की रफ़्तार कम हुई थी और वह भारत से पिछड़ गया था। पर भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्त हो गई है।
निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री ऐसे समय बनाया गया है जब देश की अर्थव्यवस्था डाँवाडोल है, इसे पटरी पर लाना उनकी प्रमुख ज़िम्मेदारी होगी। इसमें वह कितनी कामयाब होंगी?
2019 के लोकसभा चुनाव में आर्थिक बदहाली कोई मुद्दा नहीं था, लोगों ने बहुमतवाद और राष्ट्रवाद पर वोट किया। पर क्या मोदी अर्थव्यवस्था की उपेक्षा कर सकते हैं?
एग्ज़िट पोल के नतीजों से शेयर बाज़ार जिस तेज़ी से आगे बढ़ा है, वह अस्थायी हो सकता है। शेयरों की क़ीमतें एक बार फिर गिर सकती हैं, क्योंकि आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है।
चुनाव मैदान से लेकर टीवी चैनलों पर यह बहस चल रही है कि प्रधानमंत्री नीच हैं या नीची जाति के हैं, पर क़ायदे से यह बहस होनी चाहिए थी कि क्या देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ चुका है या आने वाला है।
मोदी की वापसी होगी या दूसरी सरकार बनेगी, इन बातों में मगन आम लोगों के लिए यह ख़तरे की घंटी है कि आपकी जेब के लिए ख़तरे वाले दिन आने वाले हैं। अर्थव्यवस्था के लिए संकट निकट है।
भारतीय अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ता ही जा रहा है। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑफ़िस ने कहा है कि औद्योगिक उत्पादन दर गिर कर 0.1 प्रतिशत पर पहुँच चुका है।