भारत के बैंकिंग क़ारोबार में बड़ी खलबली की तैयारी है। रिज़र्व बैंक के एक समूह ने राय दी है कि देश के बड़े उद्योग घरानों को बैंकिंग लाइसेंस दिए जा सकते हैं। जानिए क्यों रघुराम राजन और विरल आचार्य ने की आलोचना...
खाने के तेलों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि लोगों की पहुँच से बाहर होते जा रहे हैं। हालत यह है कि सरसों का तेल जो ग़रीबों का खाद्य तेल माना जाता है खुदरा बाज़ार में डेढ़ सौ रुपए लीटर से भी ज़्यादा का हो गया है।
कोरोना का कहर कम हो जाने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था उसकी चपेट से लंबे समय तक नहीं निकल पाएगी, यह बात तो पहले से कही जा रही है, पर अब इसे लेकर अधिक चिंता की बात कही जा रही है।
ऐसे समय जब चीन अपने उत्पाद पूरी दुनिया में बेचने के लिए हर मुमकिन उपाय कर रहा है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कड़ी टक्कर दे रहा है, एशिया प्रशांत के 15 देशों ने एक व्यापार समझौते पर दस्तख़त किए हैं।
आरबीआई का अनुमान है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में 8.6 फ़ीसदी की सिकुड़न आएगी। अब तकनीकी तौर पर भी कहा जा सकता है कि भारत में आर्थिक मंदी आ गई है।
वैसे तो पिछले लंबे समय से अर्थव्यवस्था के क्षेत्र से आ रही लगभग सभी ख़बरें निराश करने वाली ही हैं, लेकिन इन दिनों बेरोज़गारी में इजाफ़े के साथ ही सबसे बड़ी और बुरी ख़बर यह है कि आम आदमी को महंगाई से राहत मिलने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में आशावादिता से भरा बयान आमजन को सुकून पहुँचा सकता है। उनका कहना है कि आँकड़े बता रहे हैं कि इसमें सुधार के बहुत लक्षण हैं।
क्या भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है? क्या मांग-खपत निकलने लगी हैं और लोग पहले की तरह न सही, पर थोड़ी-बहुत ख़रीद-फ़रोख़्त करने लगे हैं?
प्याज की आँसू निचोड़ू क़ीमतों से लोगों को राहत मिल भी नहीं पाई है कि आलू के भाव बढ़ने लगे हैं। केंद्र सरकार ने जिस तरह प्याज के निर्यात पर रोक लगाई थी, उसी तरह आलू के आयात का फ़ैसला कर कीमतों को काबू में रखने की कोशिश तो कर रही है, पर सवाल उठता है कि उसे इस तरह के कृत्रिम प्रयास करने ही क्यों पड़ते हैं।
शुक्रवार को सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के आपातकालिक प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए प्याज के भंडारण की सीमा तय कर दी। प्याज की कीमतें जिस तरह से और जिस तेजी से बढ़नी शुरू हुई हैं, उसे देखते हुए सरकार के पास कोई चारा भी नहीं था।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि 30 लाख अराजपत्रित यानी नॉन-गजेटेड कर्मचारियों को बोनस दिया जाएगा, जिस पर सरकार को 3,737 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।
ऐसे समय में जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका और यूरोप की मजबूत अर्थव्यवस्थाएं कोरोना महामारी की चपेट से निकलने के लिए जूझ रही हैं, चीन ने 4.9 प्रतिशत की विकास दर दर्ज कर सबको चौंका दिया है।
सवाल यह उठने लगा है कि क्या चीन अमेरिका को पछाड़ कर, उसे पीछे धकेल कर दुनिया की पहले नंबर की अर्थव्यवस्था बन चुका है। यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आँकड़ों के अध्ययन करने से यह तसवीर उभर कर सामने आती है।
वैश्विक भूख सूचकांक में भारत की स्थिति बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान से भी बदतर है। 107 देशों की सूची में भारत 94 वें स्थान पर है। दूसरी ओर, बांग्लादेश 75 वें, म्यांमार 78 वें और पाकिस्तान 88 वें स्थान पर हैं।
बुधवार को सरकार के साथ 30 किसान संगठनों की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन वह नारेबाजी और शोरगुल के बीच ख़त्म हो गई। कृषि मंत्री के मौजूद नहीं रहने से गुस्साए किसानों ने बिल की प्रतियाँ फाड़ कर फेंक दीं।