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घरेलू काम से निकलकर वेतन वाली नौकरियों में जा रहीं महिलाएँ?

क्या वेतन वाली नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है? सरकार के आँकड़े कुछ ऐसे ही संकेत देते हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने लोगों के हर रोज़ समय के इस्तेमाल पर एक सर्वे रिपोर्ट जारी की है। यानी रिपोर्ट में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि पुरुष और महिलाएँ हर रोज कितना समय किस तरह का काम करते हैं। इसमें कहा गया है कि महिलाओं के वेतन वाले काम करने के समय में बढ़ोतरी हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की रोजगार और इससे जुड़े काम में भागीदारी पिछले छह साल में 21.8 फ़ीसदी से बढ़कर 25 फ़ीसदी हो गई है। इसका मतलब है कि बिना वेतन वाले घरेलू काम में महिलाओं की भागीदारी कम हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा समय के उपयोग पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 15-59 आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं की रोज़गार और इससे जुड़ी गतिविधियों में हर रोज भागीदारी 2019 में 70.9% और 21.8% थी जो 2024 में बढ़कर 75% और 25% हो गई है।

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सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सर्वेक्षण के आधार पर एक बयान में दावा किया कि महिलाओं द्वारा बिना सैलरी वाले घरेलू काम में बिताया गया समय 2019 में 315 मिनट की तुलना में 2024 में घटकर 305 मिनट रह गया। इसका मतलब साफ़ है कि बिना सैलरी वाले काम से सैलरी वाले काम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।

यह सर्वेक्षण इस पर किया गया है कि महिलाओं और पुरुषों द्वारा हर रोज किस तरह का काम कितने समय के लिए किया जाता है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण ने पाया कि 2024 में रोज़गार और इससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल लोगों ने इसके लिए हर रोज 440 मिनट बिताए। पुरुषों ने 473 मिनट बिताए, जबकि महिलाओं ने 341 मिनट बिताए। इसका मतलब साफ़ है कि हालाँकि महिलाओं की भागीदारी रोजगार और इससे जुड़े काम में बढ़ी है, लेकिन वह अभी भी पुरुषों की तुलना में कम है। 

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे काम करने के मामले में पीछे हैं। दरअसल, महिलाओं को घरेलू काम की ज़िम्मेदारी होती है इसलिए वे बिना सैलरी वाले घर के काम भी करती हैं। इस तरह के काम महिलाएँ पुरुषों से काफ़ी ज़्यादा करती हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि महिलाएँ घर के सदस्यों के लिए बिना किसी सैलरी के प्रतिदिन 289 मिनट बिताती हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है, 'पुरुष सदस्यों ने ऐसी गतिविधियों में एक दिन में 88 मिनट बिताए। महिलाओं ने अपने घर के सदस्यों की देखभाल में एक दिन में 137 मिनट बिताए, जबकि घर के पुरुष सदस्यों ने 75 मिनट बिताए।' 
मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि 15 से 59 वर्ष की आयु की लगभग 41% महिलाओं ने अपने घर के सदस्यों की देखभाल की। इस उम्र के पुरुषों की ऐसी गतिविधि में भागीदारी 21.4% रही।
देखभाल संबंधी गतिविधियों में भाग लेने वाली महिलाओं ने एक दिन में लगभग 140 मिनट बिताए, जबकि इसी आयु वर्ग के पुरुष उत्तरदाताओं ने 74 मिनट बिताए।
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रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण में 1,39,487 परिवार शामिल थे। ग्रामीण क्षेत्रों में 83,247 और शहरी क्षेत्रों में 56,240 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया। इसमें छह वर्ष और उससे अधिक आयु के 4,54,192 लोगों की राय ली गई। इसमें से ग्रामीण क्षेत्र में 2,85,389 और शहरी क्षेत्र में 1,68,803 लोगों की राय ली गई।

सर्वेक्षण के सवालों का जवाब देने वाले छह और उससे अधिक उम्र के लोगों ने संस्कृति, छुट्टी और मास मीडिया के इस्तेमाल से संबंधित गतिविधियों के लिए एक दिन में 171 मिनट बिताए। इसमें पुरुषों ने 177 मिनट और महिलाओं ने 164 मिनट बिताए। छह से 14 वर्ष की आयु के बच्चों ने सीखने से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक दिन में 413 मिनट बिताए।

(इस रिपोर्ट का संपादन अमित कुमार सिंह ने किया है।)
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क़मर वहीद नक़वी
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