हरियाणा की किसान राजनीति के बड़े नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा है कि हरियाणा के किसान 26 नवंबर को संसद की ओर मार्च करना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें संयुक्त किसान मोर्चा की हां का इंतजार है। किसान आंदोलन की क़यादत संयुक्त किसान मोर्चा के हाथ में है।
चढ़ूनी रविवार को रोहतक पहुंचे थे और यहां उन्होंने हरियाणा के किसानों के साथ बैठक की थी। बैठक में ही इस बात का फ़ैसला लिया गया कि 26 नवंबर को संसद की ओर मार्च किया जाएगा।
बता दें कि 26 नवंबर को किसानों के आंदोलन को एक साल का वक़्त पूरा हो जाएगा। इस दौरान किसानों ने ग़ाज़ीपुर बॉर्डर के साथ ही टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर भी अपना खूंटा दमदार ढंग से गाड़ रखा है।
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चढ़ूनी ने कहा कि किसान आंदोलन में भाग ले रहे कई किसानों को समन भेजा जा रहा है, उन्होंने कहा कि किसान इन समन पर न जाएं। इससे पहले किसान नेता राकेश टिकैत ने भी कहा था कि अगर 26 नवंबर तक कृषि क़ानूनों को वापस नहीं लिया जाता है तो किसान अपना आंदोलन तेज़ करेंगे।
निलंबित हो गए थे चढ़ूनी
चढ़ूनी को ‘किसान संगठनों को पंजाब में चुनाव लड़ना चाहिए’, ये बयान देना भारी पड़ गया था। संयुक्त किसान मोर्चा ने चढ़ूनी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए उन्हें हफ़्ते भर के लिए निलंबित कर दिया था। चढ़ूनी ने कहा था कि किसानों को ‘मिशन पंजाब’ के लिए जुटना चाहिए। लेकिन किसान संगठनों ने उनके इस सुझाव को व्यक्तिगत बताते हुए खारिज़ कर दिया था।
लखीमपुर खीरी में मंत्री पुत्र की गाड़ी से किसानों को कुचल डालने की घटना को लेकर देश भर में काफ़ी बवाल हो चुका है। इसके बाद से देश भर के किसान जबरदस्त ग़ुस्से में हैं। लखीमपुर खीरी में 4 किसानों सहित 8 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें बीजेपी के तीन कार्यकर्ता और एक पत्रकार भी शामिल है।
घटना के मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्रा के पिता और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी की मोदी कैबिनेट से बर्खास्तगी की मांग को लेकर किसान और विपक्ष लगातार आवाज़ उठा रहा है।
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