नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में बहुत सुनहरे सपने लेकर सत्ता में आए थे। विधानसभा चुनाव के पहले जब नीतीश कुमार जनता से वादा करते थे कि किसी बिहारी को भूख के कारण बिहार नहीं छोड़ने दूँगा। लेकिन उस सपने का क्या हुआ?
मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम में लड़कियों के यौन उत्पीड़न के जिस मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था उसी के आरोपियों में से एक मंजू वर्मा को अब जदयू से टिकट दिया गया है।
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए काफी दिनों से आज-कल होते-होते मंगलवार को एनडीए के बीच सीटों का बंटवारा हो सका। यह बंटवारा एकदम नये फ़ॉर्मूले- जेडीयू प्लस और बीजेपी प्लस से हुआ।
लोक जनशक्ति पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए से बाहर होकर लड़ेगी। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड दोनों इस बात को मान चुके हैं कि अब उन्हें लोजपा के बिना चुनाव लड़ना होगा और उसी हिसाब से अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।
राष्ट्रीय जनता दल अपनी 144 सीटों के कोटे से वीआईपी और झारखंड मुक्ति मोर्चे को कुछ सीटें देगा। इसके अलावा कांग्रेस को 70 सीटें दी गई हैं। सीपीआई एमएल को 19, सीपीआईएम को 6 और सीपीआई को 4 सीटें दी गई हैं।
घटना के १६ दिन और पीड़िता के मरने के तीन दिन बाद आसानी से अधिकारी कह सकते हैं कि पोस्टमोर्टेम रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई। अब इसे झूठ कौन ठहराएगा? लाश तो जल चुकी है।
क्या बिहार विधान सभा चुनाव में जातीय समीकरण ही सब कुछ तय करेगा? यह एक बड़ा सवाल है। बीजेपी और नीतीश इसके लिए तैयार हैं। तेजस्वी को अपना क़ूबत दिखाना है। यह भी तय होना है कि मतदाता जब डर से ख़ामोश रहता है तो रिज़ल्ट क्या होता है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में गठबंधन बनाने का काम क्रिकेट के टी-20 जैसा चल रहा है। कौन किधर जा रहा है और कौन कितनी सीट पर लड़ना चाहता है, इस पर सस्पेंस बना हुआ है। महागठबंधन में कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों से क़रार पर तक़रार बनी हैं।