मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम में लड़कियों के यौन उत्पीड़न के जिस मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था उसी के आरोपियों में से एक मंजू वर्मा को अब जदयू से टिकट दिया गया है। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जारी उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम है। वह पूर्व में नीतीश सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री थीं। मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था, उनको जेल हुई थी और फ़िलहाल वह ज़मानत पर बाहर हैं।
मंजू वर्मा का नाम 115 लोगों की उस सूची में है जिसको जनता दल यूनाइटेड ने 28 अक्टूबर से होने वाले चुनाव के लिए बुधवार को जारी किया है। चुनाव के लिए उनको टिकट दिए जाने के बाद फिर से उनके नाम पर विवाद होने की संभावना है और विपक्षी दल इसको चुनाव में मुद्दा बना सकते हैं।
यह इसलिए मुद्दा हो सकता है क्योंकि मंजू वर्मा पर आरोप भी काफ़ी गंभीर रहे थे। मुज़फ्फ़रपुर शेल्टर होम मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा का क़रीबी माना जाता है। ब्रजेश ठाकुर को आजीवन कारावास की सज़ा हुई है। शेल्टर होम में 34 लड़कियों से दुष्कर्म होने का मामला सामने आया था। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो मंजू वर्मा को बिहार की नीतीश सरकार की कैबिनेट से इस्तीफ़ा देना पड़ा था। हालाँकि जब कोर्ट में पेशी की बात आई तो वह पेश नहीं हो सकी थीं। इसके बाद कहा गया कि वह फरार हो गई थीं।
मंजू वर्मा की गिरफ़्तारी न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस की खिंचाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में राज्य के डीजीपी को पेश होने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि यह कैसे हो सकता है कि कैबिनेट मंत्री फरार हो और किसी को पता ही न हो कि वह कहाँ हैं। सीबीआई ने 2018 के अगस्त महीने में मंजू वर्मा के आवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनके घर से अवैध हथियार के साथ 50 कारतूस भी बरामद हुए थे। इसके बाद से ही मंजू वर्मा फरार चल रही थीं। पुलिस क़रीब दो महीने से उनकी तलाश में छापेमारी कर रही थी। आख़िरकार नवंबर 2018 में मंजू वर्मा ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
इसके बाद वह तब फिर से चर्चा में आई थीं जब बीजेपी के मंच पर दिखी थीं। मार्च 2019 में सोशल मीडिया पर एक तसवीर वायरल हो रही थी जिसमें मंजू वर्मा एक चुनावी सभा के मंच पर बैठी थीं। उस चुनावी सभा को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने संबोधित किया था।
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ग़ौरतलब है कि टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेस, मुम्बई ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में बालिका गृह की संवासनियों को प्रताड़ित करने एवं उनके यौन शोषण की शिकायत का जिक़्र किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने समाज कल्याण विभाग को मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला कल्याण पदाधिकारी द्वारा इस मामले में महिला थाने में 31 मई 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। 2 जून को इस मामले के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत 8 लोगों को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया गया था।
मेडिकल रिपोर्ट में 34 लड़कियों से बलात्कार होने की पुष्टि हुई थी। कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीड़िताओं के बयान दर्ज कराए गए थे। इसमें पीड़िताओं ने अपने ऊपर हुए अत्याचार को बयां किया था और यह रोंगटे खड़े कर देने वाला था।
विपक्ष ने सरकार से यह सवाल पूछा था कि आख़िर इस मामले में किसे बचाने की कोशिश की जा रही है। जब मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम की 7 बच्चियों के ग़ायब होने की ख़बर आई थी तो आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे किस शख़्स को बचाने की साज़िश हो रही है? सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग के बावजूद ये दुस्साहस कौन कर रहा है? तेजस्वी ने तंज कसा था कि आख़िर 'सुशासन बाबू' नीतीश कुमार को किस बात का डर है?
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